Saran News : अरवल सदर अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद सिविल सर्जन पर हुए हमले की बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कड़ी निंदा की है. संघ ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि 21 जुलाई तक कार्रवाई नहीं होने पर 22 जुलाई को पूरे बिहार में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा. हालांकि आपातकालीन सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी.
स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया ज्ञापन
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा गया है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और दोषियों के खिलाफ त्वरित एवं कठोर कार्रवाई होनी चाहिए.
प्रसूता की मौत के बाद हुआ था हमला
सारण जिले के मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोहित ने बताया कि अरवल सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उत्पन्न चिकित्सीय जटिलताओं के कारण एक प्रसूता की मौत हो गई थी. चिकित्सकों ने मरीज को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने कथित रूप से अस्पताल परिसर में हंगामा किया और पीछे से सिविल सर्जन पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया.
हिंसा से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है असर
संघ ने कहा कि किसी मरीज की मृत्यु या प्रतिकूल चिकित्सीय परिणाम को हिंसा का आधार बनाना कानून के शासन के विरुद्ध है. ऐसी घटनाएं चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल तोड़ती हैं तथा स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं.
संघ ने सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने राज्य सरकार से 24 घंटे के भीतर सभी आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारी, सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई तथा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि 21 जुलाई तक कार्रवाई नहीं हुई तो 22 जुलाई को पूरे बिहार में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा, जबकि आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहेंगी.
