छपरा मेडिकल कॉलेज में 47 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, काम किया बंद, ओपीडी सेवा प्रभावित, जानें वजह

Chapra Medical College : छपरा मेडिकल कॉलेज में चार महीने से वेतन न मिलने के कारण 47 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. डॉक्टरों के काम बंद करने से ओपीडी सेवाएं ठप हो गई हैं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कॉलेज अधीक्षक ने 15 अगस्त तक वेतन भुगतान की उम्मीद जताई है.

Chapra Medical College : छपरा मेडिकल कॉलेज में चार महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज 47 जूनियर डॉक्टर सोमवार को हड़ताल पर चले गए. डॉक्टरों ने कामकाज बंद कर प्रदर्शन किया, जिससे ओपीडी सेवा प्रभावित हुई और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. डॉक्टरों का कहना है कि अप्रैल से वेतन लंबित है और कई बार अधिकारियों से भुगतान की मांग की जा चुकी है. कॉलेज अधीक्षक ने जल्द वेतन मिलने की उम्मीद जताई है.

चार महीने से वेतन नहीं मिलने पर हड़ताल

राजकीय छपरा मेडिकल कॉलेज में सोमवार को 47 जूनियर डॉक्टरों ने कामकाज बंद कर दिया. डॉक्टर अप्रैल से वेतन नहीं मिलने से नाराज हैं. वेतन भुगतान की मांग को लेकर कई बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर डॉक्टरों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया.

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काम बंद कर डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन

हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टरों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन किया. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार चार महीने तक वेतन नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं. घर के खर्च के साथ बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो रही हैं.

ओपीडी सेवा प्रभावित, मरीज परेशान

जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की ओपीडी सेवा प्रभावित हुई. सुबह इलाज कराने पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. कई मरीज डॉक्टरों के ड्यूटी पर नहीं मिलने के कारण वापस लौटते या इलाज की व्यवस्था के लिए इंतजार करते नजर आए.

मरीजों ने कहा- डॉक्टर और सरकार के विवाद में हम क्यों परेशान

मरीजों ने हड़ताल के कारण इलाज प्रभावित होने पर नाराजगी जताई. मरीज शैलेश कुमार ने कहा कि डॉक्टर और सरकार के बीच का मामला है, लेकिन इसका असर मरीजों पर नहीं पड़ना चाहिए. वहीं मरीज सुलेका पांडे ने बताया कि रात से पेट में दर्द था और इलाज कराने मेडिकल कॉलेज पहुंचीं, लेकिन डॉक्टरों के हड़ताल पर होने की जानकारी मिली.

डॉक्टरों ने जल्द वेतन भुगतान की मांग की

हड़ताल में शामिल डॉक्टर सर्वोत्तम सिंह, रविकांत, प्रिंस कुमार, उत्कर्ष श्रीवास्तव, आशीष कुमार और कंचन कुमारी समेत अन्य जूनियर डॉक्टरों ने लंबित वेतन का जल्द भुगतान करने की मांग की. डॉक्टरों का कहना है कि नियमित काम करने के बावजूद चार महीने से वेतन नहीं मिलना गंभीर समस्या है.

अधीक्षक ने जिलाधिकारी को दी जानकारी

मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक सीपी जयसवाल ने डॉक्टरों की हड़ताल की जानकारी सारण जिलाधिकारी को देने की बात कही. उन्होंने बताया कि वेतन भुगतान को लेकर उनके स्तर से रिपोर्ट भेजी जा चुकी है और मामले की जानकारी जिला प्रशासन को भी है.

15 अगस्त से पहले वेतन मिलने की उम्मीद

छपरा मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक सीपी जयसवाल ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों को अप्रैल से वेतन नहीं मिला है. उनके स्तर से रिपोर्ट भेजी गई है. उन्होंने 15 अगस्त से पहले वेतन मिलने की उम्मीद जताई है. साथ ही हड़ताल की जानकारी भी जिलाधिकारी को दे दी गई है.

मेडिकल कॉलेज में 312 टीचिंग पद स्वीकृत

राजकीय छपरा मेडिकल कॉलेज में कुल 312 टीचिंग स्टाफ के पद स्वीकृत हैं. इनमें प्रोफेसर और एचओडी के 24, एसोसिएट प्रोफेसर के 47, असिस्टेंट प्रोफेसर के 74 और सीनियर रेजिडेंट या ट्यूटर के 84 पद शामिल हैं. इसके अलावा जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के 58 पद स्वीकृत हैं.

अन्य पदों पर भी है स्वीकृति

मेडिकल कॉलेज में मेडिकल ऑफिसर के 16, लेडी मेडिकल ऑफिसर के छह और एपिडेमियोलॉजिस्ट कम लेक्चरर, स्टैटिस्टिक्स कम लेक्चरर, कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के एक-एक पद स्वीकृत हैं. जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ने कॉलेज में मानव संसाधन और भुगतान व्यवस्था से जुड़े सवाल भी खड़े किए हैं.

8 जनवरी 2025 को हुआ था मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल का उद्घाटन 8 जनवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. करीब 425 करोड़ रुपये की लागत से 20 एकड़ में बने इस संस्थान में 500 बेड का अस्पताल और 100 एमबीबीएस सीटों वाला मेडिकल कॉलेज है.

नई व्यवस्था के बीच वेतन भुगतान का मुद्दा

मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं को धीरे-धीरे विस्तार दिया जा रहा है. ऐसे समय में जूनियर डॉक्टरों का चार महीने का वेतन लंबित होना व्यवस्था के सामने चुनौती के रूप में सामने आया है. डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों पर पड़े असर ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है.

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By संजय भारद्वाज

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