छठ में घर लौटे प्रवासियों को साधने में जुटे प्रत्याशी

लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से लोगों का अपने घरों की ओर लौटना शुरू हो गया है.

दिघवारा. लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से लोगों का अपने घरों की ओर लौटना शुरू हो गया है. हर दिन प्रवासी लोगों के घर पहुंचने से गांव और शहरों के वीरान घरों में फिर से रौनक लौट आयी है. अपनों की वापसी से परिजनों के चेहरों पर प्रसन्नता झलक रही है. इन प्रवासियों की घर वापसी से विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशी और उनके समर्थक भी खुश नजर आ रहे हैं. प्रत्याशी पहले इनसे हाल-चाल पूछ रहे हैं और फिर चुनाव तक रुकने का मनुहार कर रहे हैं. लोगों से अपील की जा रही है कि वे लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी सहभागिता दर्ज कर बिहार में एक अच्छी सरकार चुनने में योगदान दें.

वोटरों के घरों में देर रात तक सक्रिय हैं प्रत्याशी

दिनभर प्रचार-प्रसार में जुटे प्रत्याशी देर रात अपने क्षेत्र के मतदाताओं के घरों में आयोजित मांगलिक और पारिवारिक आयोजनों में शामिल हो रहे हैं. ऐसे आयोजनों में प्रत्याशी लोगों से मिलकर अपने पक्ष में समर्थन की अपील कर रहे हैं. कई बार एक ही कार्यक्रम में अलग-अलग दलों के प्रत्याशी भी आमने-सामने दिखायी दे रहे हैं. राम-राम, सलाम-दुआ के बीच सभी एक-दूसरे को जीत की शुभकामनाएं देते दिखते हैं लोकतंत्र की यही खूबसूरती है.

टिकट की अनुपलब्धता बनी प्रवासियों के लिए बड़ी बाधा

दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों से लौटे प्रवासियों ने छठ के बाद अपने कार्यस्थल पर लौटने के लिए पहले से ही टिकट बुक कर रखे हैं. ऐसे लोग बताते हैं कि 28 अक्टूबर को छठ समाप्त होते ही छह नवंबर को चुनाव है. इतने लंबे समय तक घर पर रुकना मुश्किल है, जबकि पर्व के बाद टिकट मिल पाना लगभग असंभव हो जाता है. कई लोगों ने प्रत्याशियों को अपनी मजबूरी बताते हुए वोट न डाल पाने का अफसोस भी जताया है.

विकास पर चर्चा और राजनीति में रुचि दिखा रहे प्रवासी मतदाता

छठ में घर लौटे प्रवासी मतदाता इस बार चुनावी चर्चाओं में भी सक्रिय दिख रहे हैं. बाजारों, गलियों और चौपालों में वे खुलकर अपनी राय रख रहे हैं. कई लोग स्थानीय नागरिकों से मौजूदा सरकार के कामकाज का फीडबैक लेते हैं, तो कुछ प्रत्याशियों के वादों पर चर्चा करते हैं. प्रवासी मतदाता न केवल मतदान की अहमियत को समझ रहे हैं, बल्कि अपने परिचितों को भी लोकतंत्र में भागीदारी के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

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Published by: Alok kumar

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