यूपीएससी में सारण के सोमेश को मिला 34वां स्थान

मढ़ौरा : हौसले बुलंद हों तो मंजिल मिल ही जाती है, चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयां आ जाये. कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया है जिले के मढ़ौरा थाने के अवारी गांव निवासी सोमेश प्रकाश उपाध्याय ने. सोमेश यूपीएससी में 34 वां स्थान हासिल किया है. सोमेश की पढ़ाई 10वीं बंगाल बोर्ड, 12वीं साइंस देवघर, […]

मढ़ौरा : हौसले बुलंद हों तो मंजिल मिल ही जाती है, चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयां आ जाये. कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया है जिले के मढ़ौरा थाने के अवारी गांव निवासी सोमेश प्रकाश उपाध्याय ने. सोमेश यूपीएससी में 34 वां स्थान हासिल किया है. सोमेश की पढ़ाई 10वीं बंगाल बोर्ड, 12वीं साइंस देवघर, बीएससी सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता से हुई है.

फिर टाटा रिसर्च इंस्टीट्यूट से एमएससी करने के बाद 2014 में यूपीएससी की तैयारी में जुट गये. लेकिन अगले ही साल 31 मई 2015 को पिता उपेंद्र उपाध्याय का निधन हो गया. इसके बाद सोमेश टूट गये. सोमेश कहता है तब चाचा विनोद उपाध्याय ने हौसला बढ़ाया. विनोद उपाध्याय औरंगाबाद में सैफ जवान हैं. वे कोलकाता में ही अपनी मां मंजू देवी और दो छोटी बहनों के साथ रहते हैं. बड़े पिताजी दिनेश्वर उपाध्याय ने भी सोमेश को आगे बढ़ाने में काफी सहयोग किया.

सोमेश का परिवार शुरू से ही आर्थिक तंगी से जूझता रहा है. पिता शुरू में ट्रक चलवाते थे. लेकिन धंधा में घाटा होने पर इस काम को छोड कर वे रोजी रोटी की तलाश में भटकने लगे. बाद में कोलकाता के प्राइवेट कंपनी में कर्मचारी बने. उनके निधन के बाद सोमेश और उनकी दो छोटी बहनों ने ट्यूशन पढ़ा कर घर चलाया. इसी पैसों से सोमेश के परिवार का खर्च सहित बहनों की पढायी का खर्च किसी तरह चलता. सोमेश भी यूपीएससी की तैयारी के दौरान ट्यूशन पढ़ाते थे. धून के पक्के सोमेश इस आर्थिक तंगी को कभी भी आरे नहीं आने दिया और अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढते गये.

पिताजी होते तो बहुत खुश होते
संयोग ऐसा कि जिस दिन(31 मई) उनके पिता ने दुनिया को अलविदा कहा, उसी दिन सोमेश का चयन यूपीएससी में हुआ. सोमेश कहते हैं कि पिताजी होते तो बहुत खुश होते. उनका सपना था कि मैं आईएएस बनूं. सोमेश अपनी सफलता का श्रेय माता, पिता, चाचा, दोस्तों और अपने शिक्षकों को देते हैं.

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