रिविलगंज, दिघवारा, मढ़ौरा व सोनपुर में जनता ने कई पार्षदों व उनके रिश्तेदारों को िकया रिजेक्ट
छपरा : जिले के रिविलगंज, दिघवारा, मढ़ौरा और सोनपुर नगर पंचायतों में के 75 वार्डों की जनता ने पार्षद चुन लिया है. इस बार के चुनाव में सभी नगर पंचायतों में जनता ने कई निवर्तमान वार्ड पार्षदों या उनके रिश्तेदारों को रिजेक्ट कर दिया है. यह इस बात की ओर संकेत देता है कि जनता को आश्वासनों से ज्यादा दिनों तक छला नहीं जा सकता. इस बार चुनाव में जनता ने नये चेहरों पर उम्मीद जतायी है. लोगों को उम्मीद है कि नवनिर्वाचित वार्ड पार्षद कुछ अलग हट कर काम करेगा.
नगर पंचायतों में समस्याओं का मकड़जाल है, मगर उनकी तकलीफों को समझनेवाला कोई नहीं है. नवनिर्वाचित वार्ड पार्षदों को जनहित के कामों पर ध्यान देना होगा. नये सदन के गठन के बाद प्राथमिकताएं तय करनी होंगी. नगर क्षेत्रों को क्लीन और ग्रीन बनाने के लिए सभी वार्डों के कचरे का उचित प्रबंधन करना होगा, तभी वार्ड में सफाई की स्थिति सुधर सकेगी और स्वच्छ शहर का सपना पूरा हो सकेगा. नगर प्रशासन को नगर से बाहर डंपिंग जोन बनाने होंगे. सोनपुर,
दिघवारा, रिविलगंज, मढ़ौरा आदि जगहों पर डोर टू डोर कचरा लेने का दावा किया जाता है मगर सफाईकर्मी के हर दिन दर्शन नहीं होते हैं. दिघवारा नगर पंचायत के लोग वर्षों से शुद्ध पेयजल को तरसते रहे हैं. पानी टंकी की उम्मीद लगाये जनता को वर्षों बाद पानी नहीं मिल सका है. मढ़ौरा व रिविलगंज का हाल भी कुछ ऐसा ही है. सोनपुर के कुछ इलाकों में पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन अधिकांश भाग आज भी अछूता है. ऐसी स्थिति में अब जनता को हर घर नल का जल योजना से काफी उम्मीदें रहेगी और इसके किर्यान्वयन के लिए नवनिर्वाचित
नये चेहरों से उम्मीद…
वार्ड पार्षदों को पूरी लगन से काम करना होगा. सभी जगहों पर जल निकासी एक बड़ी समस्या है. बारिश में नगर की सूरत नरक जैसी बन जाती है. इस पर नगर सरकारों को काम करना होगा और हर गली पक्की नाली जैसी योजनाओं पर योजनाबद्ध तरीकों से काम करना होगा. आज भी इन नगर पंचायतों में कई ऐसे वार्ड हैं, जहां सड़क बनने का इंतजार है. ऐसे जगहों पर प्राथमिकता से सड़क बनवाने पर जोर देना होगा. इसके अलावे दिघवारा व मढ़ौरा जैसे नगर पंचायतों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर है. दिघवारा के 18 वार्डों में लगभग 600 पोलों पर लगे बिजली से चलने वाले स्ट्रीट लाइट में अधिकांश लाइट चोरी हो गये हैं. फिर भी नगर प्रशासन उन लाइटों को जलाने के एवज में प्रत्येक महीने डेढ़ लाख से अधिक का बिजली बिल देता है, जो जनता के पैसों की बरबादी है.
