रेलमंत्री के नहीं आने से लोगों में मायूसी है

छपरा (सदर) : 22 दिन पूर्व 17 अप्रैल को इस कार्यक्रम का आयोजन छपरा कचहरी स्टेशन पर होना था. इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर एक सप्ताह तक लाखों रुपये की लागत से मंच, टेंट व शिलापट्ट लगाने के कार्य को अंतिम रूप 16 अप्रैल के दिन के दो बजे तक चला. अंतत: रेलवे मुख्यालय […]

छपरा (सदर) : 22 दिन पूर्व 17 अप्रैल को इस कार्यक्रम का आयोजन छपरा कचहरी स्टेशन पर होना था. इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर एक सप्ताह तक लाखों रुपये की लागत से मंच, टेंट व शिलापट्ट लगाने के कार्य को अंतिम रूप 16 अप्रैल के दिन के दो बजे तक चला. अंतत: रेलवे मुख्यालय से खबर मिली की रेल मंत्री सुरेश प्रभु का कार्यक्रम टल गया. जिसे लेकर छपरा वासियों में जगा उत्साह ठंडा पड़ गया. परंतु उन्हें यह उम्मीद थी कि पुन: कार्यक्रम छपरा में होगा.

जिसे लेकर अभी तक प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों के कई चिह्न यथा टेंट के लिए बांस-बल्ले, शिलापट्ट लगाने के लिए दिवार के अलावें मंच तक बने हुए है. परंतु, रेलवे के यह घोषणा के बाद कि अब यह कार्यक्रम थावे में होगा. आम लोगों में एक ओर जहां रेलमंत्री के छपरा नहीं आने के कार्यक्रम को ले मायूसी है वहीं लाखों-लाख खर्च के बावजूद कार्यक्रम स्थगित करने तथा पुन: संबंधित कार्यक्रम को छपरा के बदले थावे में कराने को लेकर भी चर्चाएं है.

आम लोगों का कहना है कि इतने बड़े रेल महकमें में आखिर कोई भी कार्यक्रम सुनियोजित तरीके से क्यों नहीं हुआ. वहीं मशरक-थावे के अलावा अन्य डेढ़ दर्जन रेल की योजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन का कार्य भी अधूरा रह गया. परंतु रेलवे ने छपरा कचहरी स्टेशन से खुलने तथा थावे से खुलकर छपरा कचहरी पहुंचने वाली ट्रेन के नये टाइम-टेबल आम यात्रियों को कोई लाभ नहीं मिलेगा. पश्चिमोत्तर बिहार चेंबर ऑफ कामर्स के सचिव पवन कुमार अग्रवाल ने रेलमंत्री से मांग की है कि रेलवे के द्वारा इस खंड पर प्रस्तावित रेलवे के टाइम टेबुल में परिवर्तन किया जाये.

वर्तमान टाइम टेबुल के तहत मशरक से छपरा कचहरी जाने वाली ट्रेन छपरा कचहरी स्टेशन पर 12.50 मिनट दिन में पहुंचेगी. ऐसी स्थिति में विभिन्न कार्यालयों में कार्य करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को इस ट्रेन का कोई लाभ नहीं मिलेगा. इसी प्रकार दिन में छपरा कचहरी से थावे जाने वाली गाड़ी दो बजकर 10 मिनट पर थावे के लिए खुलेगी.
ऐसी स्थिति में प्रमंडलीय मुख्यालय शहर स्थित सिविल कोर्ट, समाहरणालय आदि कार्यालयों में अपने कार्यो के लिए आने वाले मशरक, मढ़ौरा, श्याम कौरिया आदि दर्जन भर स्टेशनों के छपरा जिला वासियों को इसका बेहतर लाभ नहीं मिलेगा. अंतत: उन्हें सड़क मार्ग का ही सहारा लेना पड़ेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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