ट्रेनों के लोड से हांफ रहा स्टेशन

अनदेखी. 25 वर्षों में छपरा जंकशन पर ट्रेनें बढ़ीं, प्लेटफाॅर्म घटे छपरा (सारण) : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंकशन के चार प्लेटफॉर्म 172 ट्रेनों के लोड से हांफ रहा है. 25 वर्षों के अंदर छपरा जंकशन से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के बजाय कम कर दी. छपरा जंकशन से होकर प्रतिदिन 140 […]

अनदेखी. 25 वर्षों में छपरा जंकशन पर ट्रेनें बढ़ीं, प्लेटफाॅर्म घटे

छपरा (सारण) : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंकशन के चार प्लेटफॉर्म 172 ट्रेनों के लोड से हांफ रहा है. 25 वर्षों के अंदर छपरा जंकशन से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के बजाय कम कर दी. छपरा जंकशन से होकर प्रतिदिन 140 सवारी गाड़ी और 32 माल ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है. सुपर फास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन में समय पालन करना और पैसेंजर ट्रेनों का ससमय परिचालन रेलवे प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है. वाराणसी मंडल के एवन क्लास स्टेशन की श्रेणी में शामिल छपरा जंकशन पर 25 वर्ष पहले प्लेटफॉर्म की संख्या 9 थी. छपरा-वाराणसी रेलखंड के छोटी लाइन के दो प्लेटफाॅर्म कम कर दिये गये,
लेकिन बड़ी रेल लाइन के प्लेटफाॅर्म की संख्या दस वर्ष तक नहीं बढ़ी. इस बीच बड़ी रेल लाइन की ट्रेनों की संख्या बढ़ती गयी. करीब दस वर्ष के बाद बड़ी रेल लाइन के प्लेटफाॅर्म की संख्या 3 से बढ़ाकर पांच कर दी गयी. पिछले वर्ष छपरा-थावे रेलखंड पर छोटी रेल लाइन की ट्रेनों का परिचालन बंद हुआ और परिवर्तन का कार्य इस वर्ष शुरू हो गया, लेकिन बड़ी रेल लाइन के प्लेटफाॅर्म का वाशेबुल एप्रन खराब होने के कारण उस पर ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया है. फिलहार चार प्लेटफाॅर्म ही बचा है. यहां से प्रत्येक 15 मिनट पर एक ट्रेन गुजरती है. इस वजह से ट्रेनों को नजदीकी स्टेशनों पर घंटों रोककर रखा जाता है.
क्या है स्थिति : छपरा जंकशन से चार दिशाओं के लिए ट्रेनों का परिचालन होता है. छपरा जंकशन से देश के सभी बड़े प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें चलायी जाती है. छपरा जंकशन से गोरखपुर-लखनऊ होते हुए नयी दिल्ली तक एक लाइन गुजरती है. दूसरी छपरा जंकशन से वाराणसी इलाहाबाद होते हुए मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद तक रेल लाइन है. तीसरी छपरा-हाजीपुर, बरौनी-हवाड़ा मेन लाइन है. छपरा से पटना के लिए भी रेल सेवा बहाल हो चुकी है. छपरा जंकशन से मशरक-थावे-कप्तानगंज होते हुए चौथी रेल खंड है. तीन रेलखंड पर ट्रेनों का सबसे अधिक दबाव है.
समय पालन में हो रही है बाधा : प्लेटफाॅर्म की कमी के कारण ट्रेनों के परिचालन में समय का पालन नहीं हो रहा है. ट्रेनों के विलंब रहने के कारण संरक्षा नियमों के पालन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है. इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. ट्रेनों को 190 किलोमीटर की दूरी तय करने में साढ़े तीन घंटे लगता है, जबकि 10 किमी की दूरी करने में डेढ़ दो घंटे लग जाता है. इस वजह से गौतम स्थान, टेकनिवास, गोल्डेनगंज स्टेशनों पर यात्री हंगामा करते हैं.
यहां विलंब होती हैं ट्रेनें
छपरा-बलिया-वाराणसी रेलखंड पर गौतम स्थान स्टेशन पर डाउन ट्रेनों का घंटों रोक कर रखा जाता है. वाराणसी से छपरा की दूरी 205 किमी है. इस दूरी को ट्रेनें चार घंटे में तय कर लेती है, लेकिन छपरा जंकशन पर प्लेटफाॅर्म खाली नहीं रहने के कारण गौतम स्थान में रोक दिया जाता है. इसी तरह छपरा-गोरखपुर रेलखंड पर डाउन साइड की ट्रेनों को टेक निवास स्टेशन पर रोक कर रखा जाता है. इसका भी कारण छपरा जंकशन पर प्लेटफाॅर्म की कमी है. छपरा-हाजीपुर रेलखंड पर अप साइड की ट्रेनों को छपरा ग्रामीण स्टेशन पर रोका जाता है. इसका भी कारण प्लेटफाॅर्म की कमी है. छपरा-मशरक रेल खंड की चार ट्रेनों को प्लेटफाॅर्म की कमी के कारण छपरा कचहरी रेलवे स्टेशन से किया जा रहा है.
बनेंगे तीन नये प्लेटफॉर्म
छपरा जंकशन के प्लेटफाॅर्म संख्या एक के वाशेबुल एप्रन का नये सिरे से निर्माण कराया जा रहा है. एक माह में यह कार्य पूर्ण हो जायेगा. तीन नये प्लेटफाॅर्म निर्माण की योजना को स्वीकृति मिल चुकी है. जल्द ही टेंडर निकाला जायेगा. तीन नये प्लेटफाॅर्म बनने से इसकी संख्या 8 हो जायेगी.
अशोक कुमार, रेलवे जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे

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