दिघवारा : कंपनी के मालिक ने बताया कि कर्मचारियों व अन्य लोगों का भुगतान करने के बाद मुंशी मिश्रा को मकर संक्रांति के पर्व में शामिल होने के लिए शुक्रवार को घर जाना था. जिसके लिए उसने छुट्टी भी ले ली थी. शुक्रवार को कर्मचारियों के बीच पेंमेंट बांटने के बाद वह घर के लिए रवाना हो जाता. मगर गुरूवार की रात्रि ही उसकी हत्या कर दी गयी.
एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का किया निरीक्षण : घटना के बाद एफएसएल की टीम ने घटना स्थल का निरीक्षण किया एवं खून, खाली खोखा आदि का सैंपल लिया एवं कैंप के कर्मियों से कई जानकारियां प्राप्त की.
दिघवारा. सारण में कई सड़क निर्माण कंपनियों के बेस कैंप अपराधियों व माओवादियों के निशाने पर रहा है. कई बार इन बेस कैंपों को निशाना बनाकर पुलिस के समक्ष चाइलेंज स्थापित किया है. माओवादियों के हमले से कैंपों की करोड़ों की संपत्तियां भी बरबाद हुई है. भगवानपुर की घटना भी नक्सली आहट की ओर इशारा कर रही है. मगर पुलिस इस घटना को नक्सली घटना मानने से साफ इनकार कर रही है. बता दे कि हाजीपुर से छपरा फोरलेन सड़क बनाने में लगी मधुकॉन कंपनी के कई बेस कैंपों पर अपराधी पूर्व में भी हमला कर चुके हैं.
दिघवारा-मटिहान पथ के मध्य अवस्थित मधुकॉन के बेस कैंप पर कई वर्ष पूर्व अपराधियों ने बमबारी कर कर्मियों में हड़कंप पैदा किया था. हालांकि इस घटना में जान-माल का भी नुकसान नहीं हुआ था. वहीं माओवादियों ने नयागांव के मधुकॉन बेस कैंप पर हमला कर पोकलेन समेत कई किमती गाड़ियों व मशीनों को जला दिया था. जिसमें करोड़ों का नुकसान हुआ था. बाद में इस घटना की जिम्मेवारी माओवादियों ने ली थी. बहरहाल देखना यह है कि पुलिस के अनुसंधान में भगवानपुर की घटना के पीछे क्या कारण निकलकर सामने आता है.
