पहले लगती थी भीड़, अब वीरानगी

छपरा(नगर) : एक जमाना था जब नववर्ष के आगमन के पूर्व लोग इसे धूम-धाम से मनाने की तैयारियों में जुट जाते थे. छपरा शहर के दियारा क्षेत्र खासकर सरयू नदी के किनारे बने घाटों पर जिस उत्साह और उमंग का नजारा देखने को मिलता था वो इस उत्सव को और भी खास बना देता था. […]

छपरा(नगर) : एक जमाना था जब नववर्ष के आगमन के पूर्व लोग इसे धूम-धाम से मनाने की तैयारियों में जुट जाते थे. छपरा शहर के दियारा क्षेत्र खासकर सरयू नदी के किनारे बने घाटों पर जिस उत्साह और उमंग का नजारा देखने को मिलता था वो इस उत्सव को और भी खास बना देता था. एक दिन पहले से ही लोग नदी घाट पर पहुंच कर पसंदीदा जगह चुन कर वहां साज-सज्जा और साफ-सफाई कर लेते थे.
नए साल के आगमन पर अपने-अपने मुहल्लों में टोली बनाकर नदी घाटों पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता था. नदी किनारे बच्चों की मस्ती, क्रिकेट का खेल और स्टोव या लकड़ी के चूल्हे पर बना भोजन नववर्ष के उत्साह को चरम पर पहुंचा देता था. बच्चे, बूढ़े, युवा तथा महिलाएं भी काफी उमंग से नदी घाट पर पिकनिक मनाने जाया करते थे. समय बदला और समय के शुरू हुआ नदी घाटों की उपेक्षा का दौर. बीते दस वर्षों में नदी घाट पर पिकनिक मनाने वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आयी. इस उपेक्षा का मूल कारण रहा नदी घाटों की सफाई को लेकर प्रशासन और आम जनता में जागरूकता का अभाव. बीते कुछ सालों में नदी के किनारे कचरा फेंकने का सिलसिला जिस कदर बढ़ा है उससे न सिर्फ लोगों में नदी घाटों पर जाने का उत्साह कम हुआ है बल्कि नदी की पवित्रता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है. खुले में शौच की आदत ने भी नदी घाटों को काफी गंदा कर दिया है. शहरी क्षेत्र में इकठ्ठा कचरे को भी खुलेआम नदी किनारे डंप किया जाता है.
छपरा के सीढ़ी घाट, दहियांवा, सोनारपट्टी, रतनपुरा, कटरा नेवाजी टोला घाट तथा नवीगंज स्थित नदी घाटों की सुध लेने वाल कोई नहीं है. इस घाटों को सफाई सिर्फ छठ महापर्व के अवसर पर की जाती है. वह भी सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जाती है.
नदी में नियमित स्नान करने वाले शहर के दहियांवा मुहल्ले के चुन्नु विश्वकर्मा बताते है कि अब नदी घाट पर पहले जैसी बात नहीं रह गयी, पहले सैकड़ों लोग नियमित स्नान के लिए जाया करते थे पर घाट के किनारे बढ़ रही गंदगी से लोगों की संख्या में काफी कमी आ गयी है. वहीं सीढ़ी घाट के पास रहने वाले गोताखोर रंजीत भगत ने बताया कि कुछ साल पहले तक एक जनवरी को पिकनिक मनाने सैकड़ों लोग अपने परिवार के साथ नदी किनारे आय करते थे. समय में आये बदलाव और नदी किनारे बढ़ रहे गंदगी से अब लोग अपने पसंदीदा पिकनिक स्पॉट पर आने से कतराने लगे हैं.

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