गीता जयंती समारोह . स्वामी वैराग्यानंद ने गीता के महत्व को समझाया
जीव उद्धार के लिए कलयुग में अवतरित होते हैं भगवान: चैतन्य
योग और तपस्या की जगह सत्संग पर दिया गया जोर
दिघवारा : मानव शरीर नाशवान है और आत्मा रहने तक ही मानव शरीर की अहमियत है. लिहाजा आम इंसान को मोह का त्याग कर ईश्वर भक्ति में मन रमाना चाहिए तभी मोक्ष की प्राप्ति संभव है. उपरोक्त बातें नगर पंचायत के मालगोदाम के सामने गीता जयंती आयोजन समिति द्वारा आयोजित हो रहे गीता जयंती साप्ताहिक समारोह के तीसरे दिन श्रद्धालुओं के बीच प्रवचन की अमृतवर्षा करते हुए खलीलाबाद से पधारे स्वामी वैराज्ञानंद जी परमहंस ने कही. स्वामी जी ने कहा कि मानव का शरीर नाशवान है मगर आत्मा अमर है एवं जीवात्मा के कर्मों के अनुसार आत्मा का एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरण होता है.
उन्होंने मोह और अज्ञानता को मानव जीवन का शत्रु बताते हुए कहा कि मोह और अज्ञानता के चक्कर में फंसकर इनसान नाशवान शरीर को अपना समझते हुए ईश्वर भक्ति से विमुख होकर भौतिक सुख सुविधाओं के फेर में फंस जाता है जो बाद में तकलीफों का कारण बनता है.
स्वामी जी ने कहा कि व्यक्ति के मन में आत्मा व शरीर से जुडी देवी व आसुरी प्रवृतियों के बीच जो महाभारत नित्य चलता रहता है उसमें जो आत्मा रूपी शाश्वत व देवी शक्तियों का अवलंबन करते हैं
वे संसार में सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करते हुए मरकर भी अपनी यश काया से अमर रहते हैं,वहीं इसके विपरीत जो शरीर में छिपी बैठी काम, क्रोध, राग, द्वेष, लोभ और अहंकार रूपी राक्षसी शक्तियों का सहारा लेते हैं वे नष्ट तो होते ही हैं,उससे पूर्व हताशा, अशांति व अतृप्ति की आग में झुलसते भी हैं.वहीं हिमाचल प्रदेश के प्रवचनकर्ता प्रकाश चैतन्य ने सांगीतिक स्वरुप में भागवत प्रसंगों की व्याख्या करते हुए कहा कि जीव कल्याण के लिए भगवान कलयुग में ही अवतरित होते हैं बशर्ते जीव निःस्वार्थ भाव से ईश्वर को याद करे. उन्होंने कहा कि मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म भक्ति व दान है .
धर्म के शरणागत होने से ईश्वर का सानिध्य व दान के सहारे पुण्य की प्राप्ति संभव है. उन्होंने कहा कि कलयुग में हर इंसान योग व तपस्या की जगह सत्संग का सहारा ले तभी मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है.उन्होंने बताया कि जुआ,मदिरा सेवन,परस्त्री गमन व हिंसा वाले जगहों पर कभी भी ईश्वर का वास नहीं होता है.
प्रवचन के क्रम में चैतन्य जी ने कई कर्णप्रिय भजनों के सहारे माहौल को भक्तिमय बनाते हुए हर किसी को झूमा दिया. तीसरे दिन के प्रवचन में थानाध्यक्ष सतीश कुमार,सुरेन्द्र प्रसाद,सीताराम प्रसाद,सूर्यनारायण प्रसाद,राधेश्याम प्रसाद,हरिचरण प्रसाद,अधिवक्ता मुनिलाल,शिक्षक अरुण कुमार,एन.के.संतोष,महेश स्वर्णकार, गजेन्द्र उपाध्याय,अमिता उपाध्याय,प्रो सुनील सिंह सरीखे कई प्रबुद्ध लोग ज्ञान गंगा में डुबकी लगाते देखे गये. इस दौरान कई गणमान्य लोग मौजूद थे.
