पहल. व्यवसायियों को जागरूक करने हेतु एसबीआइ ने बनायी टीम
छपरा : नोटबंदी के बाद देश में जिस कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की मुहिम चली है उस दिशा में छपरा भी अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है. नोटबंदी के पहले छपरा के कुछ गिने-चुने दुकानों में ही पॉइंट ऑफ सेल(स्वैप मशीन) की व्यवस्था थी जिसका उपयोग भी बहुत कम लोग किया करते थे. पर नोटबंदी के बाद दुकानदारों को हुई परेशानी ने न सिर्फ स्वैप मशीन की जरूरत को बढ़ावा दिया है बल्कि इस मशीन की उपयोगिता अब व्यवसायियों के साथ ग्राहकों को भी प्रमाणिक लगने लगी है. अब स्वैप मशीन से लोग खरीदारी कर रहे हैं.
स्वैप मशीन लगाने के लिए आ रहे आवेदन : नोटबंदी के बाद छोटे-बड़े सभी व्यवसायियों ने कैशलेस ट्रांजेक्शन के महत्व को समझते हुए स्वैप मशीन लगाने में रुचि दिखाई है. एसबीआइ क्षेत्रीय शाखा से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी के बाद ऐसे कई व्यवसायी हैं जिन्होंने स्वैप मशीन लेने के लिए आवेदन जमा कराएं हैं. नोटबंदी के बाद प्राप्त सैकड़ों आवेदन में से अबतक लगभग 40 दुकानदारों को मशीन उपलब्ध करा दी गई है जबकि कई ऐसे व्यवसायी हैं जिनका आवेदन प्रक्रिया में है.
कैसे प्राप्त करें स्वैप मशीन : स्वैप मशीन का उपयोग छपरा जैसे शहर में भले ही कम मात्रा में हो रहा है पर बैंको ने जिस आसान प्रक्रिया के माध्यम से व्यवसायियों को इसे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है वो निश्चित ही आने वाले दिनों में एक नई क्रांति लेकर आयेगा. वैसे रजिस्टर्ड दुकान जिसका चालू खाता एसबीआइ के ब्रांच में है वो बैंक के साथ एक एग्रीमेंट साइन कर स्वैप मशीन के लिए आवेदन दे सकते हैं. बैंक द्वारा एग्रीमेंट किये हुए आवेदन को पटना मुख्यालय में भेजा जायेगा.
कुछ दुकानदार ऐसे भी हैं जिन्होंने नोटबंदी से पहले ही स्वैप मशीन लगा लिया था. इन दुकानदारों को अब अपना व्यवसाय करने में काफी आसानी ही रही है. शहर के एक मोबाइल दुकानदार अनिकेत कश्यप ने बताया कि उन्होंने इसी साल जनवरी महीने में अपने दुकान में स्वैप मशीन लगाया था. शुरुआत के दिनों में तो ग्राहक इस मशीन के इस्तेमाल को प्रमुखता नहीं देते थे पर जब से नोटबंदी की घोषणा हुई है उनके दुकान पर लगभग 90 प्रतिशत ट्रांजेक्शन स्वैप मशीन के ही माध्यम से हो रहा है.
स्वैप मशीन लगाने को लेकर बैंक में आ रहे आवेदन
माइक्रो एटीएम की तर्ज पर काम करेंगी मशीने
कैसे काम करेंगी मशीनें
जिन दुकानदारों के पास स्वैप मशीन की व्यवस्था है वहां बिल्कुल आसानी से कैशलेस ट्रांजेक्शन किया जा सकता है. इसके लिए ग्राहक को अपने डेबिट कार्ड से जितनी खरीदारी करनी है उतनी रकम उस मशीन से स्वैप करनी होगी. 2000 तक की खरीददारी पर 0.75 प्रतिशत सर्विस टैक्स के साथ और 2000 से अधिक की खरीददारी पर 1 प्रतिशत सर्विस टैक्स के साथ भुगतान करना होगा. हालांकि आम लोगों को सुविधा प्रदान करने के लिए आरबीआई ने 31 दिसंबर तक सर्विस टैक्स नहीं लेने का फैसला किया है ताकि लोग स्वैप मशीन के जरिये कैशलेस ट्रांजक्शन के प्रति जागरूक हो सकें. जिन व्यवसायियों के पास स्वैप मशीन की सुविधा उपलब्ध है.
वो इसका इस्तेमाल माइक्रो एटीएम के तर्ज पर भी कर सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को 2000 रूपए तक कैश की आवश्यकता है तो वो दुकानदार के पास जाकर अपने कार्ड से स्वैप कर पैसे ले सकता है. इस व्यवस्था के तहत दुकानदार को प्रति ट्रांजेक्शन 5 रूपए के हिसाब से बैंक द्वारा भुगतान किया जायेगा. एसबीआइ के क्षेत्रीय व्यावसायिक कार्यालय द्वारा पॉइंट ऑफ सेल(स्वैप मशीन) के इस्तेमाल प्रति व्यवसायियों को जागरूक करने हेतु एक टीम का गठन किया गया है. यह टीम बैंक की विभिन्न शाखाओं के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण स्तर पर व्यवसायियों को स्वैप मशीन के उपयोग और उसके इस्तेमाल से होने वाले फायदों के प्रति जागरूक करेगी. इसके साथ ही टीम द्वारा बैंक के ग्राहकों को हाल ही में लांच मनी ट्रांजेक्शन एप ( बडी) के उपयोग से सम्बंधित जानकारियां भी दी जायेगी.
क्या कहते है बैंक अधिकारी
नोटबंदी के बाद व्यवसायी अपने दुकानों में स्वैप मशीन लगाने को लेकर जागरूक हैं. बैंक को प्रतिदिन आवेदन प्राप्त हो रहे हैं. सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर 10 से 15 दिनों में व्यवसायियों को स्वैप मशीन उपलब्ध करा दिया जा रहा है. इसके साथ ही क्षेत्रीय व्यावसायिक शाखा के द्वारा एक टीम का भी गठन किया गया है जो शहरी एवं ग्रामीण स्तर पर दुकानदारों को पॉइंट ऑफ़ सेल के प्रति जागरूक करेगी.
सिंकु कुमार परिरा, मुख्य प्रबंधक(प्र), क्षेत्रीय व्यावसायिक कार्यालय, एसबीआइ, छपरा
