मौत के बाद पसरा सन्नाटा

दिघवारा : किस्मत के आगे किसी की एक नहीं चलती है और कोई भी इंसान किस्मत की मार से बच नहीं सकता है,वरना किसे पता था अपनी दादी के दर्द कम करने की कोशिश करने वाला जवान पोता रितेश खुद जिंदगी को अलविदा कर अपने परिजनों को ताउम्र न भूलने वाला दर्द दे जायेगा. दरअसल […]

दिघवारा : किस्मत के आगे किसी की एक नहीं चलती है और कोई भी इंसान किस्मत की मार से बच नहीं सकता है,वरना किसे पता था अपनी दादी के दर्द कम करने की कोशिश करने वाला जवान पोता रितेश खुद जिंदगी को अलविदा कर अपने परिजनों को ताउम्र न भूलने वाला दर्द दे जायेगा. दरअसल अवतारनगर के झौवा टोला के पास बुधवार को सड़क दुर्घटना में जिस रितेश की मौत हुई वह युवक खलपुरा एएनडी स्कूल के वर्ग दसवीं का छात्र था और बड़ा व्यवहार कुशल लड़का था. मौत के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है. मृतक रितेश के दादा ने बताया कि रितेश की दादी को वर्ष 2010 में चेहरे में लकवा मार गया,

जिसके बाद इसी साल जून में उसकी दादी का एक हिस्सा लकवा की चपेट में आ गया.जिससे उक्त महिला बेड पकड़ ली थी.अपनी बूढी दादी की स्थिति देखकर रितेश काफी व्यथित रहता था. इसी बीच बुधवार को वह दादी के लकवा का इलाज कराने के लिए कुछ लोगों को अपने घर लाया था. जिसके लिए उसने पूर्व से ही खाना बनवा रखा था. मगर उनलोगों के आने के बाद वह उसी में से एक लोग की बाइक लेकर तेल भराने बोधाछपरा आ गया और तेल लेकर लौटने की उसकी यात्रा उसके जीवन की अंतिम यात्रा बन गयी.

जिस स्कूल गाड़ी ने बाइक सवार रितेश को ठोकर मारी थी उसे उसका ड्राईवर घटनास्थल पर ही छोड़कर फरार हो गया जिसे युवक की मौत के बाद पुलिस के सामने आक्रोशित लोगों ने पूर्णतः क्षतिग्रस्त कर दिया. जाम कर रहे आक्रोशित लोगों ने सारण एसपी की गाड़ी पर पथराव की सूचना है. इस घटना में डोरीगंज थाना के एसआई रमेश तिवारी और

एक कांस्टेबल को चोट आई है. जाम देर शाम साढ़े सात बजे के बाद हटा . आक्रोशित लोगों का सड़क जाम देर शाम तक चला जिस कारण छपरा पटना मार्ग पर महाजाम सी स्थिति दिखी और यात्रियों को घंटो जाम में फसना पड़ा. लगन तेज होने के चलते दर्जनों दूल्हों के अलावे बैंड बाजा और बारात की गाडियो को भी जाम का सामना करना पड़ा.एनएच से सटी ग्रामीण सड़कें भी बड़ागोपाल स्टेशन तक जाम दिखी और यात्री जाम से कराहते नजर आये.

परिजनों का रोते रोते था बुरा हाल
युवक की मौत के बाद परिजनों का रोते रोते बुरा हाल था.बेटे के शव से लिपटकर पिता नागेन्द्र राय बारम्बार बेहोश हो जा रहे थे तो दादा सत्यनारायण राय व दादी मंजू देवी की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे.मृतक की मां,भाई व बहन के दहाड़ मारकर रोने से माहौल गमगीन हो गया था.गांव वालों के सांत्वना देने के बाद भी परिजनों की चित्कार कम होने का नाम नहीं ले रही थी.

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