बाजार ब्रांच में ग्राहकों को समझाते क्षेत्रीय प्रबंधक ओपी चौधरी.
छपरा : नोटबंदी को लेकर जनता बैंक और डाकघरों में सुबह से लेकर शाम तक कड़ी मशक्कत कर रही है. केंद्र सरकार के इस फैसले ने आम से लेकर खास सबको कतारों में खड़ा कर दिया है. आम आदमी जहां दिन भर भूख और प्यास के साथ संघर्ष करते हुए जैसे-तैसे अपने नोट को बदलने के लिए बैंक के काउंटर पर पहुंच रहा है वहीं लोगों को हर संभव सहूलियत प्रदान करने के लिए बैंककर्मी भी लगातार काम करते नजर आ रहे हैं.
लंबी कतारों में खड़े लोग भले हो बैंक के बाहर से कर्मियों पर लापरवाही और अनियमितता का आरोप लगाकर उन्हें कोस रहे हों मगर जब वहीं लोग बैंक के अंदर बने काउंटर पर पहुंच रहे हैं तो उन्हें काम के बोझ झेल रहे इन बैंककर्मियों की असली स्थिति का पता चल रहा है. बैंकों की स्थिति बाहर से देखने में चाहे जैसी हो पर अंदर की वास्तविकता बैंककर्मियों की कर्मठता और कार्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शा रही है. कई कर्मचारी है जो शहर से दूर रहते हैं और हर दिन लंबी दूरी तय कर बैंक आते हैं. सभी बैंककर्मियों की छुट्टी भी रद्द कर दी गयी है. इस स्थिति में बैंककर्मी पिछले एक सप्ताह से अपने घर नहीं जा सके हैं. कई बैंककर्मी है जो अपने परिजनों से दो-दो दिन तक फोन पर बात भी नहीं कर पा रहे हैं.
छपरा के स्टेट बैंक मेन ब्रांच, बाजार ब्रांच तथा आइसीआइसीआइ बैंक के मैनेजर अपने कक्ष से निकलकर लगातार लाइन में खड़े लोगों की मदद कर रहे हैं. ऐसे कई लोग हैं जिन्हें लेनदेन की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है. बैंक मैनेजर ऐसे लोगों को नई प्रक्रिया से लाईन में ही अवगत करा रहे हैं. कई बैंकों में तो बैंक अधिकारी लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को धैर्य और संयम बरतने का सुझाव दे रहे हैं.
दिव्यांगों और वृद्धों का रखा जा रहा ध्यान :
लम्बी-लम्बी कतारों के बीच बैंक उन लोगों का विशेष ध्यान रख रहा है जो वृद्ध या दिव्यांग हैं. बैंक से पैसा लेने आये ऐसे लोगों के लिए अलग लाइन की व्यवस्था की गयी है. वही बैंक अधिकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को ऐसे लोगों को सहजता से पैसा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
