समस्या. ओवरब्रिज के निर्माण के बाद अब रेलवे समपार को बंद करने जा रही रेलवे
छपरा : शहर के साढ़ा बाजार स्थित रेलवे समपार 45 ए (साढ़ा ढाला) का अस्तित्व अब समाप्ति के कगार पर पहुंच चुका है. ओवरब्रिज के निर्माण के बाद अब रेलवे इस समपार को बंद करने जा रही है. इस रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर हाल ही में ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है, जिससे आम लोगों की समस्याएं काफी कम हुई हैं, आये दिन लगने वाले जाम की समस्या से भी निजाद मिल गया है और इस पार से उस पार जाने वाले लोगों के समय की भी बचत होने लगी है. रेलवे ने अब साढ़ा स्थित समपार को बंद करने का निर्णय ले लिया है जिससे स्थानीय लोगों के बीच समस्या खड़ी हो गयी है.
साढ़ा ढाला के दक्षिण दिशा में स्थित हेमनगर तथा कुलदीप नगर मुहल्ले में रहने वाले लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज बनने से फायदा तो हुआ है पर रेलवे ढाला के बंद हो जाने के बाद इसके नजदीक रहने रहने वाले लोग के लिए शहर से संपर्क स्थापित करने में काफी परेशानी होगी साथ ही स्कूल जाने वाले बच्चे तथा बुजुर्ग लोगों को पैदल ओवरब्रिज पार करने में भी कठिनाई हो सकती है.
स्थानीय लोगों ने जताया विरोध : रेलवे द्वारा इस समपार 45 ए को बंद किये जाने कि सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने एक बैठक की. बैठक में आम सहमति से साढ़ा ढाला रेलवे क्रॉसिंग को बंद किये जाने का विरोध करने का निर्णय लिया गया
. स्थानीय लोगों ने बताया कि गोरखपुर मंडल के रेल जनसंपर्क पदाधिकारी को इस बाबत लिखित सूचना दी जा चुकी है. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी इस घटनाक्रम से अवगत कराया जा चुका है. हालांकि रेलवे ने साढ़ा ढाला को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
आवागमन को बंद करने हेतु 2-3 दिनों कार्य शुरू कर दिया जायेगा, पर यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि अगर रेलवे इस समापार को बंद करने का प्रयास करेगी तो इसे रोकने के लिए आंदोलन किया जायेगा.
पूर्व में भी अस्तित्व का संकट झेल चुका है साढ़ा ढाला : लोग बताते हैं कि 1980 के दशक में साढ़ा शिव मंदिर के पास रेलवे क्रॉसिंग का निर्माण कराया गया था. निर्माण के महज दो वर्ष बाद ही छोटी लाइन को बड़ी लाइन बनाने को लेकर इस क्रॉसिंग को बंद कर दिया गया.
इसे लेकर काफी हंगामा हुआ और स्थानीय लोगों ने आंदोलन भी किया.तब जाकर दुबारा 1984 में तत्कालीन रेल महाप्रबंधक डी हरिराम और सांसद प्रो. सत्यदेव सिंह के संयुक्त प्रयास से शिव मंदिर से 100 मीटर पूरब दिशा में नये समापार का निर्माण कराया गया जो अब साढ़ा ढाला के नाम से जाना जाता है.
