पूरी पारदर्शिता के साथ प्रोन्नति तथा लॉटरी के आधार पर होगी पदस्थापना
छपरा(सदर) : जिले के विभिन्न मध्य विद्यालयों में 393 प्रधानाध्यापकों के पद पर प्रोन्नति का मामला विगत कई माह से खटाई में पड़ा है. हालांकि दूसरी बार डीइओ का प्रभार लेने वाले सारण के जिला शिक्षा पदाधिकारी चंद्रकिशोर प्रसाद यादव मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति के पूरे मामले में प्रशासन की ओर से मनोनीत दो सदस्यों की ओर से उठायी गयी. प्रोन्नति की प्रक्रिया प्रोन्नति कमेटी के सभी सदस्यों के आपसी बैठक एवं सर्वसम्मति के बाद ही पूरी की जायेगी. वहीं प्रोन्नति के बाद विभिन्न प्रोन्नत प्रधानाध्यापकों की पदस्थापना बिना किसी दबाव के लॉटरी के माध्यम से किया जायेगा.
30 अगस्त को पूर्णत: प्रभार मिलने के बाद कई शिक्षकों द्वारा प्रोन्नति के लटके मामले के संबंध में पूछे जाने पर डीइओ ने कहा कि इस संबंध में सभी आवश्यक प्रक्रिया पुन: शुरू की जायेगी तथा विधिवत सदस्यों की बैठक कर कोर्ट के आदेश के आलोक में निर्णय लिया जायेगा. प्रोन्नति सूची में शामिल शिक्षकों के फोल्डर एवं उठायी गयी. आपत्तियों के निराकरण करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जायेगा. शिक्षकों के हित में प्रोन्नति को अंतिम रूप दिया जायेगा.
डीइओ से मिलने वाले कई शिक्षकों द्वारा बनायी गयी सूची तथा तैयार पदस्थापन सूची के संबंध में सूचना देने पर डीइओ ने कहा कि अभी प्रोन्नति हुई ही नहीं तो पदस्थापन सूची बनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता. यदि पूर्व में प्रोन्नति के पहले किसी भी प्रकार की सूची बनायी गयी है तो वह निश्चित रूप से मानक के अनुकूल नहीं मानी जायेगी. वहीं पदस्थापन के लिए लाचार एक साल के अंदर अवकाश ग्रहण करने वाले,
महिला शिक्षिकाओं आदि के संबंध में विभागीय गाइड लाइन का पालन किया जायेगा. उधर पूर्व में बनायी गयी सूची का पूरी तरह अवलोकन कर वरीय उपसमाहर्ता स्तर के दो सदस्यों द्वारा सात बिंदुओं पर उठायी गयी अनियमितता के अलावे अन्य अनियमितता की जांच कर ही सूची बनाये जाने की डीइओ के निर्णय को लेकर प्रोन्नति समिति के कुछ सदस्यों तथा कई शिक्षकों के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी है.
पदस्थापना में मानकों को नजर अंदाज कर अपना निजी स्वार्थ साधने का प्रयास किया था. वहीं पदस्थापना के नाम पर कई शिक्षकों से कुछ विभागीय पदाधिकारियों व कर्मियों द्वारा नाजायज वसूली के बावजूद उनका स्वार्थ सिद्ध नहीं होने के कारण नाराजगी देखी जा रही है.
प्रोन्नति सूची में मिली विभिन्न त्रुटियों के सुधार के बाद ही अंतिम निर्णय: डीइओ
प्रोन्नति के पहले पदस्थापना का सवाल ही पूरी तरह गलत
