परिवादी की समस्या का नहीं हुआ समाधान

सोनपुर : लोक शिकायत निवारण कार्यालय शिकायतों का निपटारा करने में अक्षम साबित हो रहा है. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के सूचना पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं संबधित पदाधिकारी. सोनपुर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में 6 जून 2016 को सोनपुर रजिस्ट्री बाजार निवासी रूदल कुमार सिंह ने वन विभाग से सबंधित […]

सोनपुर : लोक शिकायत निवारण कार्यालय शिकायतों का निपटारा करने में अक्षम साबित हो रहा है. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के सूचना पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं संबधित पदाधिकारी. सोनपुर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में 6 जून 2016 को सोनपुर रजिस्ट्री बाजार निवासी रूदल कुमार सिंह ने वन विभाग से सबंधित एक परिवाद दायर किया. अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय से कुल 11 तारीखें पड़ी. परिवादी प्रत्येक तिथि को लोक शिकायत निवारण कार्यालय मेें उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का काम किया.

लेकिन कोई भी तारीख पर वन विभाग के पदाधिकारी या कर्मचारी लोक शिकायत निवारण कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ. परिवादी रूदल कुमार सिंह वन विभाग के खिलाफ परिवाद दर्ज कराते हुए बकाया राशि के भुगतान कराने का अनुरोध किया था. रूदल सिंह ने आरोप लगाया था कि वन विभाग ने वर्ष 2007 में डेढ़ बीघा जमीन बीस हजार रुपये वार्षिक किराये पर लिया था. विभाग ने जमीन का उपयोग लकड़ी रखने में किया.

दो वर्षों तक विभाग के द्वारा किराये का रुपया दिया गया. उसके बाद किराये का भुगतान बंद कर दिया गया. किराये का भुगतान बंद होने पर वन विभाग के दिघवारा कार्यालय से लेकर छपरा कार्यालय तक कई बार विभाग के पदाधिकारी से मिला. लेकिन हर बार एक ही जवाब मिलता रहा कि आवंटन मिलते ही भुगतान कर दिया जायेगा. इस संबंध में कई बार पत्राचार भी किया गया है. उसके बाद भी कोई जवाब विभाग के द्वारा नहीं मिला.

उसके बाद कानूनी नोटिस भी भेजा गया. लेकिन कोई जवाब कानूनी नोटिस का विभाग द्वारा नहीं दिया. परिवादी रूदल कुमार सिंह को राज्य सरकार के द्वारा बनाये गये लोक शिकायत निवारण अधिनियम का सहारा लेना पड़ा. लेकिन 11 तारीखें के बाद जिस तरह का निर्णय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के द्वारा 13 अगस्त 2016 को दिया गया. उसको देख कर यही लगता है कि लोक शिकायत निवारण अधिनियम का कोई मतलब अधिकारियों के सामने नहीं है. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने निर्णय में लिखा है कि परिवादी सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर उपस्थित संबंधित पदाधिकारी को कई बार सूचना देने के उपरांत भी सुनवाई की किसी भी तारीख पर उपस्थित नहीं हुए.

परिवादी ने अपने लिखित शिकायत आवेदन में भी यह कहा है कि विभाग से संबंधित पदाधिकारी को कई बार पत्र लिखकर मुआवजे की मांग की गयी, लेकिन संबंधित पदाधिकारी के तरफ से कोई भी जवाब नही आया. संबंधित पदाधिकारी इतने कर्तव्यहीन है कि उन्होंने परिवादी के वकालतन नोटिस का भी जवाब नहीं दिया. संबंधित पदाधिकारी के अनुशासनहीनता की वजह से परिवादी की समस्या का निष्पादन नहीं हो सका. इसी के उपरांत वाद की कारवाई समाप्त की जाती है.

अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने आदेश में वन विभाग के पदाधिकारियों के लिए कहा
फरियादी लगातार हाजिर होते रहे लेकिन नहीं हुआ समस्या का समाधान

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