फैसले पर टिकी हुई थीं सबकी निगाहें

गंडामन मामला. आरोपित मीना को 17 वर्षों के सश्रम कारावास व 3.75 लाख रुपये अर्थदंड की सजा छपरा (कोर्ट) : जिला ही नहीं राज्य व देश में चर्चित गंडामन मिड डे मिल हादसा में सोमवार को सिविल कोर्ट छपरा का अंतिम फैसला आ गया. न्यायाधीश ने मुख्य आरोपित मीना देवी को भादवि की दो धाराओं […]

गंडामन मामला. आरोपित मीना को 17 वर्षों के सश्रम कारावास व 3.75 लाख रुपये अर्थदंड की सजा

छपरा (कोर्ट) : जिला ही नहीं राज्य व देश में चर्चित गंडामन मिड डे मिल हादसा में सोमवार को सिविल कोर्ट छपरा का अंतिम फैसला आ गया. न्यायाधीश ने मुख्य आरोपित मीना देवी को भादवि की दो धाराओं के तहत 17 वर्ष की सश्रम कारावास तथा 3.75 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. अधिवक्ताओं से खचाखच भरे कोर्ट में सबकी निगाहें न्यायाधीश पर टिकी हुई थी. साथ ही सभी न्यायाधीश के उस आदेश को सुनने के लिए व्याकुल भी थे कि आखिर उनके द्वारा कौन सजा दी जायेगी. आखिर वह वक्त भी आया, जब न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया, जिसे सुन सभी के बीच चर्चाएं शुरू हो गयी. वहीं कठघरे में खड़ी आरोपित मीना देवी सजा सुनने के उपरांत रो पड़ी. जिसे देख कई की आंखें नम हो गयी.
सजा सुनाने के पूर्व न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता को सजा की बिंदु पर अपना पक्ष रखने को कहा. बचाव पक्ष के अधिवक्ता भोला प्रसाद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दोष सिद्ध मीना देवी का अपराध करने का कोई आशय नहीं था, जो अपराध हुए है वो दुर्घटना का हुआ है. साथ ही दोष सिद्ध का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है. अधिवक्ता ने कहा कि मीना देवी का दुर्भाग्य है कि यह घटना उसके रहते विद्यालय में घटी. उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि मीना एक महिला है तथा उसके छोटे-छोटे बच्चे है. इसलिए मीना को न्यूनतम दंड देने की प्रार्थना करते है. वहीं अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक सुरेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि मीना देवी की उपेक्षा के कारण 23 बच्चों की मृत्यु हो गयी. वहीं 25 बच्चे बीमार हो गये. पीपी ने मीना के अपराध के परिणाम की गंभीरता को देखते हुए कठोरतम दंड दिये जाने की प्रार्थना की. सजा के उपरांत बचाव पक्ष के अधिवक्ता भोला प्रसाद व नरेश प्रसाद राय ने कहा कि वे कोर्ट के आदेश का सम्मान करते है. कोर्ट द्वारा जजमेंट की कॉपी का अवलोकन करेंगे, वैसे मेरे मुवक्किल का कहना है कि आदेश के विरुद्ध वह उच्च न्यायालय जायेगा. वहीं लोक अभियोजक सुरेंद्र नाथ सिंह, एपीपी राघवेंद्र बहादुर चांद व सहायक समीर कुमार मिश्रा ने सजा को न्यायोचित बताया.
वकीलों की बात सुनने के बाद जज ने कहा : दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत न्यायाधीश विजय आनंद तिवारी ने आदेश सुनाते हुए कहा कि विचाराधीन मामले में दोषी सिद्ध मीना देवी की घोर उपेक्षा के कारण 23 निर्दोष और मासूम बच्चों की जान चली गयी तथा 25 बच्चे मृत्यु से संघर्ष कर अपना जीवन पाये. घटना में किसी का एक मात्र पुत्र तो किसी का एक से अधिक संतानें काल का ग्रास बनी. इस घटना ने मध्याह्न भोजन जैसी योजना पर ही प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया. इस प्रकार मीना देवी की उपेक्षा का परिणाम गंभीर, और व्यापक रहा है. मीना देवी की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद भी यह मामला उन मामलों की श्रेणी में आता है, जिनमें किये गये अपराध के लिए अधिकतम दंड प्रदान किया जाना न्याय संगत होगा.
पल-पल बदलते रहा कोर्ट का नजारा : छपरा (कोर्ट) . मशरक के गंडामन मामले में सोमवार को मामले में मुख्य आरोपित बनायी गयी तत्कालीन प्रधान शिक्षिका मीना देवी पर कोर्ट द्वारा फैसला सुनाया जाना था. इसको लेकर सभी की नजरें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय विजय आनंद तिवारी के कोर्ट पर लगी हुई थी. हालांकि कोर्ट द्वारा 24 अगस्त को ही मीना देवी को दोषी करार दिया था. सबों को पता था कि फैसला सेकेंड हाफ के बाद आयेगा इसलिए सभी उस घड़ी का इंतजार कर रहे थे. कोर्ट के फैसले को लेकर मीना देवी के मायके तथा पति अर्जुन राय के परिजनों की बेचैनी के साथ ही कोर्ट के अधिवक्ता, कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों में भी थी. जैसे-जैसे घड़ी की सुई तीन बजे से ऊपर बढ़ने लगी लोगों में उसी प्रकार उत्सुकता भी बढ़ती गयी कि आखिर कोर्ट अपना अंतिम फैसला क्या सुनाता है. फैसला सुनने को लेकर सभी के कदम एडीजे द्वितीय के कोर्ट की ओर बढ़ने लगे, तभी 3.34 बजे शोर हुआ कि मीना देवी को कोर्ट हाजत से कोर्ट लाया जा रहा है, जिसे सुन जो जहां था, वहां से फैसला
सुनने के लिए कक्ष के बरामदे में पहुंचने लगे. कक्ष में सीट लेने को लेकर कुछ अधिवक्ता पहले ही कोर्ट में बैठे थे. वहीं सुरक्षा कर्मियों ने अधिवक्ताओं को छोड़ कर किसी को भी कोर्ट में प्रवेश नहीं करने दिया. बताते चले कि 24 अगस्त को दोषी करार दिये जाने के दिन बचाव पक्ष के अधिवक्ता पहले कोर्ट पहुंचे थे तो अंतिम
फैसला के दिन लोक अभियोजक पूर्व में आ गये और बचाव पक्ष के अधिवक्ता का इंतजार कोर्ट द्वारा किया जाने लगा. पता चला कि वे जिला जज के कोर्ट में एक मामले की पैरवी कर रहे है. हालांकि ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, वे भी जल्द ही कोर्ट में पहुंच गये.
मीना देवी के फैसले का टाइम ट्रैक
3.30 बजे – लोक अभियोजक सुरेंद्रनाथ सिंह, एपीपी राघवेंद्र बहादुर चांद व सहायक समीर कुमार मिश्रा के साथ कोर्ट में पहुंचे.
3.33 बजे – दोष सिद्ध मीना देवी को कोर्ट हाजत से कोर्ट के लिए प्रस्थान
3.35 बजे – मीना देवी कोर्ट कक्ष में पहुंची
3.38 बजे – बचाव पक्ष के अधिवक्ता भोला प्रसाद, सहायक नरेश कुमार राय के साथ कोर्ट में पहुंचे.
3.40 बजे – न्यायाधीश विजय आनंद तिवारी ने बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने को कहा
3.53 बजे – बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपना पक्ष समाप्त किया
3.55 बजे – लोक अभियोजक ने अपना पक्ष रखा
3.58 बजे – लोक अभियोजक ने अपना पक्ष समाप्त किया
3.59 बजे – न्यायाधीश विजय आनंद तिवारी ने फैसला सुनाना प्रारंभ किया
4.05 बजे – न्यायाधीश ने अपना फैसला समाप्त किया.

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