आपदा. जलालपुर, मांझी, दरियापुर व गड़खा में नये क्षेत्रों में फैल रहा बाढ़ का पानी
छपरा (सदर) : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों एवं गांवों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वहीं नये प्रखंड यथा जलालपुर, मांझी, दरियापुर समेत 370 गांवों के 1 लाख 20 हजार परिवार बाढ़ से प्रभावित है. सबसे ज्यादा प्रभावित सोनपुर के 40 हजार परिवारों के अलावे, छपरा सदर के 35 हजार, रिविलगंज के 9750, दिघवारा के 12 हजार 844 परिवारों के अलावे गड़खा के 14 हजार परिवार प्रभावित है. हालांकि प्रशासन द्वारा बनाये गये कुल 21 शिविरों में 18 हजार 300 लोगों को तैयार खाद्य सामग्री पहुंचाने का दावा कर रहा है.
हालांकि बाढ़ पीड़ितों में अपर्याप्त राहत सामग्री को लेकर जगह-जगह नाराजगी है. प्रशासन ने बाढ़ के मद्देनजर गड़खा, दरियापुर में भी 21 नावें नि:शुल्क चलाने का दावा कर रहा है. इस प्रकार जिले में कुल 352 नावें चल रही है. लगातार नये क्षेत्रों में पानी फैलने के कारण बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं बढ़ती जा रही है. शिविरों में जिला प्रशासन द्वारा बुनियादी जरूरतों को उपलब्ध कराने के अलावे नये स्थानों पर भी शिविर खोले जा रहे है.
गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं का सर्वेक्षण कर अस्प्ताल में पहुंचाने का निर्देश : डीएम दीपक आनंद ने सरकार के प्रधान सचिव के निदेश के आलोक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को चिन्हित करने तथा जिनके प्रसव की संभावित तिथि नजदीक है उन्हें बचाव हेतु एम्बुलेंस या वोट एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल में पहुंचाने, कमजोर नवजात शिशुओं को चिन्हित कर चिकित्सीय उपचार हेतु अस्पताल में ले जाने तथा कितने का उपचार किया गया इसका विवरण प्रतिदिन देने का निर्देश दिया गया है.
साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कहीं भी महामारी फैलने की आशंका तथा उसपर नियंत्रण के लिए प्रारंभिक उपाय एवं आवश्यक दवाओं के भंडारण का निर्देश दिया है. इसके लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलंत चिकित्सा दलों के साथ-साथ वोट एम्बुलेंस के द्वारा प्रतिदिन मरीजों के किये गये उपचार एवं भ्रमण किये गये क्षेत्र का विवरण देने का निर्देश दिया है.
राहत शिविर में बच्चों को वस्त्र के अलावें दो समय भोजन के अतिरिक्त नाश्ता देने का निर्देश : मुख्य सचिव बिहार ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से निर्देशित किया है कि प्रतयेक राहत शिविर में रह रहे लोगों को दो समय भोजन के अलावे नाश्ता का व्यवस्था करना है. वहीं बाढ़ प्रभावितों के भोजन के लिए स्टील का बर्तन क्रय करना एवं राहत शिविर में रह रहे लोगों एवं बच्चों को वस्त्र की व्यस्था का भी निर्देश मुख्य सचिव ने दिया. सुरक्षा के मद्देनजर प्रत्येक प्रभावित से नावों की टैगिंग के अलावे नाव पर लाल झंडा लगाने व हर हाल में नाव की क्षमता से ज्यादा नाव पर नहीं बैठाने का निर्देश मुख्य सचिव ने दिया है. मुख्य सचिव के निर्देश के बाद जिला प्रशासन इन आदेशों का अनुपालन करने में लगा है.
21 शिविरों में 18 हजार 300 बाढ़पीड़ित लोगों के लिए पहुंचायी गयी खाद्य सामग्री
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में महामारी फैलने की आशंका से हो रहा दवाओं का भंडारण
गर्भवती महिलाओं व नवजातों को अस्पताल में पहुंचाने का मुख्य सचिव ने दिया निर्देश
लिंक बाधित होने से पांच दिनों से ट्रेजरी का काम बाधित
संचार व्यवस्था गड़बड़ होने के कारण जिला ट्रेजरी का लिंक गत शनिवार से ही बाधित है. ऐसी स्थिति में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जिला आपदा कार्यालय को राहत एवं बचाव कार्य के लिए भेजी गयी 5 करोड़ रूपये की राशि की जहां निकासी नहीं हो रही है. वहीं ट्रेजरी में सैकड़ों विपत्र निकासी के लिए फंसे हुए है. जिला कोषागार पदाधिकारी राजीव कुमार गुप्ता के अनुसार शनिवार के दोपहर के बाद से ही लिंक बाधित हुआ है.
उम्मीद है कि शुक्रवार को लिंक बाधित होने की समस्या खत्म हो जायेगी तथा विपत्रों का निष्पादन शुरू हो जायेगा. मालूम हो कि लिंक बाधित होने से अन्य वित्तीय संस्थाओं के कार्य भी प्रभावित है.
छपरा शहर के रतनपुरा में बाढ़ की पानी की वजह से बंद पड़ा स्कूल व डोरीगंज के सिंगही में डूबा यज्ञ मंडप.
आपदा पीड़ितों के साथ है सरकार : दूबे
दाउदपुर (मांझी) : गंगा के प्रकोप से सोधी नदी के बांध टूटने के कारण मांझी के कई गांव में पानी घुस गया है. लेकिन मरहॉ पंचायत के पांच गांव का स्थिति भयावह हो गयी है. जिसमें पटखोली, अलियासपुर, नटवर बिरबल, नटवर प्रशुराम, नटवर गोपी एवं सबदरा गांव शामिल है. उक्त बाते मांझी विधायक विजय शंकर दूबे ने कहा कि इस आपदे के विकट परिस्थिति मैं आप लोगों के साथ हूं.
उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में लोगो को भूखे मरने नही दिया जायेगा. सरकार अपने एजेंसी के माध्यम से हर सम्भव बचाव कार्य एवं राहत सामग्री पहुंचाने मे जुटी हुई है. मरहा पंचायत के मुखिया अच्छेलाल साह की अध्यक्षता में पंचायत समिति द्वारा पीड़ित लोगों का सूची तैयार किया गया. जिन्हें छ: किलो चूड़ा, मीठा का पॉकेट तैयार कर बांटने का कार्य प्रारम्भ हुआ.
