किसानों को सता रही भविष्य की चिंता चिंताजनक. किसानों के अनुदान की विभिन्न योजनाएं आचार संहिता के कारण सरकारी फाइलों में सिमटीं विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के दावों एवं वादों पर किसानों की नहीं दिख रही रुचिधान की फसल तो चौपट हो ही गयी, हथिया की बारिश नहीं होने से रबी फसल की बेहतरी की उम्मीद धूमिल सारण में एक लाख, सीवान में एक लाख 2 हजार तथा गोपालगंज में 97 हजार हेक्टेयर में गेहूं का लक्ष्य संवाददाता, छपरा (सदर)आश्विन माह का दूसरा पखवारा शुरू है. प्रकृति की बेरुखी व प्रशासनिक उदासीनता के कारण किसानों के खेतों की खरीफ फसल खास कर धान 80 फीसदी चौपट हो गयी. हथिया नक्षत्र में बारिश नहीं होने से रबी फसल की बेहतरी की उम्मीद भी क्षीण हो गयी है. ऐसी स्थिति में एक ओर किसानों को अपने भविष्य की चिंता, तो दूसरी ओर राजनेताओं को अपनी कुरसी की चिंता है. ऐसी स्थिति में दिन-रात प्रमंडल के 24 विधानसभा क्षेत्रों में विधानसभा के लिए आगामी दो चरणों में क्रमश: 28 अक्तूबर को सारण तथा एक नवंबर को सीवान, गोपालगंज में होनेवाले चुनाव में अपनी जीत पक्की करने के लिए विभिन्न दलों के व निर्दलीय उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं. परंतु, अपने प्यासे खेतों के कारण खरीफ की फसल बरबाद होने व बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसल की भी बेहतरी की उम्मीद नहीं होने से किसानों को चुनाव में खास रुचि नहीं दिखती. ऐसी स्थिति में चुनाव में खड़े उम्मीदवारों को किसान मतदाताओं के सवालों का जवाब टाल-मटोल करने व भविष्य के सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं सूझता. खरीफ का लक्ष्य तो निर्धारित हुआ, परंतु आचार संहिता हावीकृषि विभाग के द्वारा प्रमंडल के सारण, सीवान, गोपालगंज में रबी की विभिन्न फसलों की खेती के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है. अक्तूबर का प्रथम पखवारा खत्म हो चुका है. किसानों के खेतों में नमी नहीं है. ऐसी स्थिति में उन्हें रबी की फसल बचाने के लिए आर्थिक संकट से जूझना होगा. उधर, सरकार के लिए वर्ष 15-16 में लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि से संबंधित कई योजनाएं प्रस्तावित हैं. इनमें कृषि यांत्रिकीकरण मेला, स्वी विधि आदि विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को खेती में बेहतर अनुदान देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. परंतु, विधानसभा चुनाव के कारण किसानों के बेहतर फसल उत्पादन के लिए कृषि अनुदान के लिए चलायी जानेवाली सभी योजनाएं आचार संहिता के कारण बाधित हैं. किसानों का सवाल है कि आखिर आचार संहिता के कारण उनकी खरीफ रबी फसल की बोआर्इ एवं सिंचाई के लिए मिलनेवाला अनुदान भी 10 नवंबर तक स्थगित रहेगा. यदि ऐसा हुआ, तो किसानों को कृषि अनुदान के योजनाओं का लाभ नहीं मिल पायेगा. खेत में लगी धान की फसल सूख गयी या शेष सूखने की स्थिति में है. वहीं, नमी के अभाव में रबी फसल की बोआई काफी महंगी हो जायेगी. इससे किसानों को मानसिक, आर्थिक एवं शारीरिक कष्ट झेलना होगा. अनिल कुमार सिंहभगवानपुर, सीवान बारिश के अभाव में आलू, तेलहन या गेहूं की फसलें सिंचाई कर बोने की मजबूरी होगी. ऐसी स्थिति में उत्पादन लागत ज्यादा होने के बवाजूद हथियार नक्षत्र में बारिश नहीं होने से रबी उत्पादन भी बेहतर नहीं होने की आशंका हो गयी है. कामेश्वर सिंह मशरकपूरे प्रमंडल में रबी फसल के लिए लक्ष्य निर्धारित है. परंतु, विधानसभा चुनाव के आचार संहिता के कारण कृषि अनुदानित योजनाओं का लाभ चुनाव तक किसानों को नहीं दिया जा सकता है. चुनाव के बाद लक्ष्य प्राप्त करने का हर संभव प्रयास किया जायेगा. बीएन रजकसंयुक्त कृषि निदेशक, सारण वर्ष 15-16 का रबी फसल लक्ष्य फसल ®®सारण ®सीवान ®®गोपालगंजगेहूं ®1 लाख ®®10200 ®®97000जौ ®®300 ®600 ®400मक्का ®26000 ®14500 ®13500दलहन ®3500 ®2700 ®2300तेलहन ®5700 ®4600 ®4550(बॉक्स के लिए)सारण की कुछ जगहों पर हुई बारिश छपरा. छपरा शहर समेत 30 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में बुधवार की दोपहर बाद छिटपूट बारिश हुई. छपरा शहर के अलावा कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वाति नक्षत्र में हुई बारिश से आम लोगों को गरमी से राहत मिली. वहीं, छपरा शहर में हुई हल्की बारिश के बाद शहर की कई सड़कें कीचड़युक्त हो गयीं. इस कारण शहर के विभिन्न मार्गों में आम जनों के लिए चलना मुश्किल हो गया. शहर की व्यावसायिक मंडियों में खास कर दशहरा, पूजा को लेकर खरीदारी करनेवालों एवं अन्य सभी बाजारों व ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के पंडाल निर्माताओं को भी बारिश के कारण परेशानी हुई.
किसानों को सता रही भवष्यि की चिंता
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