अब तक एक बार ही निर्दलीय प्रत्याशी को मिली है जीत हाल सोनपुर विधानसभा क्षेत्र का संवाददाता,
दिघवारा : राजनीतिक अखाड़े में जीत की उम्मीद व किस्मत चमकने के भरोसे के साथ राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में उतरते हैं एवं अपने भाग्य को आजमाते हैं.
यह बात अलग है कि बहुत कम बार ही निर्दलीय प्रत्याशी जीत का स्वाद चख पाते हैं. ज्यादातर निर्दलीय प्रत्याशियों को जनता अस्वीकार कर देती है. यह बात जरूर है कि जब निर्दलीय प्रत्याशियों को उम्मीद से ज्यादा वोट मिल जाता है, तो वे लोग कुछ प्रत्याशियों की किस्मत बनाने व बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा डालते हैं.
अधिकतर बार निर्दलीय वोटकटवा बन कर रह जाते हैे. 1957 में रामविनोद सिंह ने दर्ज की थी जीत 1952 से 2010 तक के हुए 15 विधानसभा चुनावों में सिर्फ 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मलखाचक निवासी रामविनोद सिंह ही चुनाव जीत सके थे एवं सोनपुर विधानसभा का दूसरा विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया था.
इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका होगी अहमइस बार विधानसभा चुनाव में सोनपुर विधानसभा क्षेत्र से भी कई नामी प्रत्याशी निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए अपनी राजनीतिक किस्मत को आजमा रहे हैं एवं हर कोई अपनी जीत का दावा कर रहा है. यह तो वक्त ही बतायेगा कि इन लोगों के दावों में कितना दम है? बहरहाल आठ नवंबर को ही पता चलेगा कि इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को कितने वोटरों ने अपना वोट दिया?
