पुरानी पटरियों पर दौड़ रही हैं ट्रेनें

संरक्षा नियमों का हो रहा है उल्लंघन नहीं बदली पटरी, बढ़ा दी गयी ट्रेनों की रफ्तार छपरा (सारण) : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा-सीवान रेलखंड पर पुरानी व जीर्ण-शीर्ण हो चुकी पटरियों पर दौर रही हैं ट्रेनें. 27 जुलाई को कोपा-सम्हौता स्टेशनों के बीच रेल पटरी टूटने के कारण भीषण रेल दुर्घटना उस समय टल गयी, […]

संरक्षा नियमों का हो रहा है उल्लंघन

नहीं बदली पटरी, बढ़ा दी गयी ट्रेनों की रफ्तार

छपरा (सारण) : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा-सीवान रेलखंड पर पुरानी व जीर्ण-शीर्ण हो चुकी पटरियों पर दौर रही हैं ट्रेनें. 27 जुलाई को कोपा-सम्हौता स्टेशनों के बीच रेल पटरी टूटने के कारण भीषण रेल दुर्घटना उस समय टल गयी,

जब पशु चरा रहे चरवाहों ने लाल रंग का गमछा दिखा कर ट्रेन को रोक दिया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ट्रेन का परिचालन शुरू हो सका.

अनुरक्षण कार्य का है घोर अभाव :

रेल ट्रैक के अनुरक्षण तथा मरम्मत कार्य का घोर अभाव है. करीब एक दशक से रेल ट्रैक के अनुरक्षण का कार्य ठेके पर दे दिया गया है. इसकी मुख्य वजह गैंगमैन, ट्रैक मैन का घोर अभाव होना बतायी जाती है. इस वजह से रेल ट्रैक पर नियमित पैट्रोलिंग का कार्य भी नहीं कराया जा रहा है.

कम क्षमता की है रेल ट्रैक : छपरा-सीवान रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन के लिए गति सीमा प्रति घंटा 75 से 80 निर्धारित है. लेकिन दोहरीकरण के बाद से ट्रेनों का परिचालन प्रति घंटा 100 किलोमीटर की रफ्तार से हो रहा है. रेल पटरी की क्षमता बढ़ाये बिना ट्रेनों की रफ्तार बढ़ा दी गयी है. साथ ही ट्रेनों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है.

क्या कहते हैं अधिकारी

रेल ट्रैक के अनुरक्षण का कार्य करनेवाले विभाग को इस संबंध में आवश्यक निर्देश समय-समय पर दिया जाता है और जिन स्थानों पर गैंगमैन की कमी है वहां आधुनिक रेल ट्रैक की जांच कर मरम्मत का कार्य कराया जाता है. अशोक कुमार

रेलवे जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी

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