छपरा (सारण) : नाव निबंधन अधिनियम का उल्लंघन किये जाने के कारण नदियों में नाव दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं. इसके प्रति परिवहन विभाग के अधिकारी उदासीन बने हुए हैं. वर्ष 2011 में राज्य सरकार के द्वारा बंगाल फेरी घाट एक्ट के तर्ज पर नाव निबंधन अधिनियम को राज्य में लागू किया गया. इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेवारी परिवहन विभाग तथा जिला प्रशासन की है. निबंधित नावों पर क्षमता व मानक के अनुरूप सामानों की ढुलाई तथा सुरक्षा का उपाय करने का प्रावधान है. इसका अनुपालन नाव संचालकों द्वारा नहीं किया जा रहा है.
मानव चालित तथा मोटर चालित नावों का अलग-अलग वर्गीकरण किया गया है. जिला परिवहन पदाधिकारी के यहां निबंधन के लिए आवेदन करने और मोटरयान निरीक्षक के द्वारा जांच करने के उपरांत नावों को निबंधित करने का प्रावधान है. मालवाहक तथा मानववाहक मोटरचालित नावों पर सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है. दुर्घटना के दौरान बचाव के लिए नावों में आवश्यक संसाधन रखे जाने का प्रावधान है तथा नावों का संचालन करनेवाले कर्मियों को प्रशिक्षित होना भी आवश्यक है. लेकिन, यहां अकुशल लोगों द्वारा नाव चलायी जाती है और नावों पर मानव छल्ला समेत अन्य संसाधन भी नहीं रखा जाता है.
एक माह में हुईं आधा दर्जन घटनाएं
डोरीगंज तथा कोइलवर एवं बड़हरा थाने की सीमा पर अवस्थित गंगा, सोन तथा सरयू नदियों में एक माह के अंदर करीब आधा दर्जन नाव दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. अधिकतर बालू वाहक नावें ही दुर्घटना की शिकार हुईं हैं. दुर्घटना की शिकार होनेवाली किसी भी नाव का निबंधन नहीं था.
चलती हैं सैकड़ों नावें, करोड़ों का होता है कारोबार : डोरीगंज से लेकर कोइलवर के बीच प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में नावें चलती हैं. इससे बालू की ढ़ुलाई का कारोबार होता है. इस धंधे में हजारों की संख्या में लोग जुड़े हैं, जिनकी जीविका का मुख्य साधन बालू से जुड़ा कारोबार है. इस कार्य में मजदूर, नाव संचालक तथा बालू की खरीद बिक्री करनेवाले लोग शामिल है. डोरीगंज मुख्य रूप से बालू के व्यवसाय को लेकर प्रसिद्ध है.
क्या कहते हैं अधिकारी
नाव निबंधन अधिनियम का पालन करने के लिए सभी अंचल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है. प्रत्येक अंचल के अंचल पदाधिकारियों को भी नाव निबंधन की जांच करने का निर्देश है.
श्याम किशोर सिन्हा
जिला परिवहन पदाधिकारी, सारण
