छपरा (सदर) :पश्चिम बंगाल के कूच बेहार स्थित लौजेंस (टॉफी) बनाने की फैक्टरी में काम करनेवाले अपने पिता के हुनर को एक दशक बाद पुन: जिंदा कर लाखों की लौजेंस फैक्टरी कर दी शुरू उनके पुत्र ने. अब तक प्रमंडल के 50 फीसदी लौजेंस व्यापार पर कब्जा कर चुके युवा उद्यमी ओमप्रकाश मिश्र बताते हैं कि अगले पांच वर्षो में पूरे राज्य या राज्य के बाहर लौजेंस व इलायचीदाना के व्यापार पर कब्जा करने की तमन्ना है.
मजदूर के बेटे ने खड़ी कर दी फैक्टरी
छपरा (सदर) :पश्चिम बंगाल के कूच बेहार स्थित लौजेंस (टॉफी) बनाने की फैक्टरी में काम करनेवाले अपने पिता के हुनर को एक दशक बाद पुन: जिंदा कर लाखों की लौजेंस फैक्टरी कर दी शुरू उनके पुत्र ने. अब तक प्रमंडल के 50 फीसदी लौजेंस व्यापार पर कब्जा कर चुके युवा उद्यमी ओमप्रकाश मिश्र बताते हैं […]

पिता से सीखी थी तकनीक:
मशरक प्रखंड के ग्रामीण इलाके विषणुपरा गांव के ब्राrाण परिवार से आनेवाले उद्यमी ओमप्रकाश मिश्र बताते हैं कि उनके पिता कृष्णानंद मिश्र पूर्व में पश्चिम बंगाल लौजेंस बनाने की फैक्टरी में कार्य करते थे. उन्हीं से सीखी थी तकनीक.
पिताहां से गांव आने के बाद 1982 में उन्होंने मैनुअल लौजेंस बनाने और बेचने का काम शुरू किया. इसमें दर्जन भर महिलाएं लौजेंस तैयार करने में लगी रहती थीं. इससे लोगों को रोजगार मिलता था व अच्छी आमदनी भी होती थी.
2004 में बंद हो गया था पिता का कारोबार
अत्याधुनिक मशीनों के दौर व आर्थिक संकट के कारण पिता के द्वारा लौजेंस बनाने का काम बंद करना पड़ा. इस दौरान पिता के पास हुनर तो था ही. उनसे लौजेंस बनाने के तौर-तरीकों को सीखा. पुन: इस कारोबार को शुरू करने व अत्याधुनिक मशीनों को लगाने के लिए प्रयास शुरू किया. इस कार्य में पीएमइजीपी के तहत 25 लाख रुपये लोन स्वीकृत होने तथा कुछ अपने संसाधन से एकत्र कर लौजेंस व इलाइचीदाना बनाना शुरू किया.
कई बेरोजगार हाथों को दिया काम
श्री मिश्र बताते हैं कि प्रकाश लौजेंस कन्फेकशनरी नाम की इस फैक्टरी में अबतक लौजेंस की चार क्वालिटी तथा इलाइचीदाना तैयार किया जाता है. प्रति दिन 10 क्विंटल लौजेंस व इलाइचीदाना बनाने और उन्हें विभिन्न बाजारों में आपूर्ति का काम किया जाता है. इस उद्योग में लगे मजदूर संजय कुमार राय, कृष्णा कुमार, इंद्रजीत आदि खुशहाल दिखते हैं. उनका कहना है कि गांव पर रह कर हमें जो मजदूरी मासिक रूप से मिलती है वह निश्चित तौर पर दूसरे प्रदेश में जाकर ज्यादा मिलने के बावजूद हमें या हमारे बच्चों के लिए खुशहाली नहीं दे पाती.
बिजली, पूंजी व अन्य समस्याएं भी
उद्यमी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में अब तक सारे प्रयास के बावजूद विद्युत आपूर्ति की सुविधा नहीं मिली, जिससे डीजल पर इन सामान को बनाने पर लागत ज्यादा आती है. वहीं, यदि और ज्यादा पूंजी मिल जाये, तो कुछ और क्वालिटी के लौजेंस और ज्यादा मात्र में बना कर बड़े स्तर पर उत्पादन का लक्ष्य रखा है. मशीन आदि खरीदने के लिए उद्योग विभाग के महाप्रबंधक रवि भूषण सिन्हा ने फैक्टरी का अवलोकन करने के बाद उद्योग विभाग से नियमानुसार ऋण स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया है.
कच्च माल मंगाने व तैयार माल भेजने में परेशानी
इस लौजेंस फैक्टरी में सामान तैयार करने के लिए कच्च माल के रूप में चीनी, लिक्विड ग्लूकोज, रैपर आदि सामग्रियों को मंगाने तथा तैयार माल को बाहर भेजने में सबसे बड़ी बाधा गांव की सड़क है. खजुरी पंचायत के विष्णुपुरा गांव की पूरब तथा पश्चिम से आनेवाली दोनों सड़कें पूरी तरह कच्ची हैं.बरसात में कीचड़ के कारण वाहनों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है.