रेल प्रशासन नहीं ले रहा सबक

125 वर्ष पुराने रेल पुल पर हो रहा है ट्रेनों का परिचालन छपरा (सारण) : मध्यप्रदेश के हरदा में हुई रेल दुर्घटना से रेल प्रशासन ने समय रहते अगर सबक नहीं लिया, तो छपरा-बलिया रेलखंड पर भी भीषण रेल दुर्घटना हो सकती है. इसकी आशंका रेलयात्रियों तथा आम लोगों में बनी हुई है. दरअसल, पटना […]

125 वर्ष पुराने रेल पुल पर हो रहा है ट्रेनों का परिचालन
छपरा (सारण) : मध्यप्रदेश के हरदा में हुई रेल दुर्घटना से रेल प्रशासन ने समय रहते अगर सबक नहीं लिया, तो छपरा-बलिया रेलखंड पर भी भीषण रेल दुर्घटना हो सकती है. इसकी आशंका रेलयात्रियों तथा आम लोगों में बनी हुई है.
दरअसल, पटना से मुंबई जा रही जनता एक्सप्रेस तथा मुंबई से वाराणसी आ रही कामायनी एक्सप्रेस हरदा के पास कालीमाचक नदी की पुलिया पर दुर्घटनाग्रस्त हो गयी. इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन पुराने पुल-पुलिया को लेकर चिंतित व परेशान है.
बताते चलें कि पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा-बलिया रेलखंड पर मांझी स्थित 125 वर्ष पुराने रेल पुल से होकर ट्रेनों का परिचालन वर्तमान में किया जा रहा है. इससे राजधानी एक्सप्रेस समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का आवागमन होता है.
अत्यधिक पुराने हो चुके इस रेल पुल से होकर गुजरनेवाली ट्रेनों की गति सीमा 15 किमी प्रति घंटे निर्धारित कर दी गयी है. साथ ही रेल पुल पर इंजन के बंद हो जाने पर स्टार्ट नहीं करने का भी निर्देश जारी किया गया है. यह स्थिति पिछले करीब दो दशकों से बनी हुई है.
क्या है स्थिति : छपरा-बलिया रेलखंड पर मांझी में सरयू नदी पर निर्मित रेल पुल पूरी तरह अपनी आयु खो चुका है. इस वजह से इस रेल पुल से कभी अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है.
छपरा को देश की राजधानी समेत कई पश्चिम व उत्तर के राज्यों को जोड़नेवाले इस रेलखंड पर स्थित पुल की दयनीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है.
पहले चलती थीं छोटी लाइन की ट्रेनें : इस रेल पुल से होकर पहले छोटी लाइन की ट्रेनों का परिचालन होता था. वर्ष 1997 में छपरा औड़िहार रेलखंड का आमान परिवर्तन किया गया. लेकिन उस समय नये रेल पुल का निर्माण नहीं किया गया. पुराने रेल पुल को ही बड़ी रेल लाइन के लिए चालू कर दिया गया.
गति सीमा के निर्धारण से विलंबित होती हैं ट्रेनें : इस रेल पुल से होकर गुजरनेवाली ट्रेनों की गति सीमा निर्धारित किये जाने से ट्रेनों के परिचालन में समय पालन में बाधा उत्पन्न हो रही है. साथ ही ट्रेनों के परिचालन में संरक्षा नियमों के पालन भी सही ढंग से नहीं हो रहा है.
हो रहा है नये रेल पुल का निर्माण
पुल के काफी पुराना हो जाने के कारण नये रेल पुल का निर्माण कराया जा रहा है, जिस पर लगभग ढाई सौ करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है. पुल का निर्माण शुरू हो गया है.
पुराने पुल की बगल में पश्चिमी साइड में बन रहे नये पुल को दोहरा रेल लाइन बिछाये जाने की दृष्टि से भी तैयार किया जा रहा है. दरअसल, इस रेलखंड के दोहरीकरण तथा विद्युतीकरण की योजना को भी स्वीकृति मिल चुकी है. हालांकि नये रेल पुल के निर्माण की गति काफी धीमी है. इससे इसको पूरा होने में अधिक समय लगने की संभावना है. बाढ़ के कारण वर्तमान में रेलवे के नये पुल के निर्माण का कार्य बाधित है. बाढ़ का पानी हटने के बाद ही निर्माण कार्य पुन: शुरू होने की संभावना है.
मांझी सरयू नदी पर स्थित रेल पुल पुराना होने के कारण गति सीमा निर्धारित की गयी है और बगल में नये रेल पुल का निर्माण कराया जा रहा है. इस पर करीब ढाई सौ करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है. नदी में जल स्तर बढ़ने के कारण कार्य की गति बाधित होती है.
अशोक कुमार
रेलवे जनसंपर्क अधिकारी
वाराणसी मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे

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