अपने लाल की सफलता पर मजलिसपुर वासी गद्गद

यूपीएससी की परीक्षा में 955वां रैंक हासिल करनेवाले प्रशांत ने पिलानी से की थी इंजीनियरिंग छपरा (सदर)/गड़खा : संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में गौरवपूर्ण सफलता पर प्रशांत की दादी शिवारो देवी समेत हर परिजन गद्गद है. गड़खा प्रखंड मुख्यालय से दो किलोमीटर दक्षिण स्थित मजलिसपुर गांव में खुशियां स्पष्ट दिखती हैं. इंजीनियर पिता […]

यूपीएससी की परीक्षा में 955वां रैंक हासिल करनेवाले प्रशांत ने पिलानी से की थी इंजीनियरिंग
छपरा (सदर)/गड़खा : संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में गौरवपूर्ण सफलता पर प्रशांत की दादी शिवारो देवी समेत हर परिजन गद्गद है. गड़खा प्रखंड मुख्यालय से दो किलोमीटर दक्षिण स्थित मजलिसपुर गांव में खुशियां स्पष्ट दिखती हैं.
इंजीनियर पिता जयमंगल सिंह एवं गृहिणी मां नीलम के द्वितीय पुत्र प्रशांत कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 955वां स्थान दूसरे प्रयास में हासिल किया है. रांची (झारखंड) के सेंट जेवियर्स स्कूल से वर्ष 2002 में 10वीं तथा कोटा स्थित आइएन स्कूल से +2 करने वाले प्रशांत कुमार ने इंजीनियरिंग की परीक्षा पिलानी स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज से 2009 में उत्तीर्ण की थी.
2015 में प्रशांत के जीवन में दो महत्वपूर्ण यादगार पल आये:ओएनजीसी में वित्त एवं लेखा पदाधिकारी के पद पर नौकरी कर रहे प्रशांत कुमार की शादी वर्ष 2015 में ही नौ मार्च को उत्तरप्रदेश के फतेहपुर की अमृता सिंह से हुई है. वह अभी महिंद्रा कोटक में पीओ के पद पर कार्यरत हैं. वहीं, चार जुलाई को प्रकाशित संघ लोक सेवा आयोग के अंतिम परिणाम में सफलता मिलने के बाद पूछे जाने पर प्रशांत सहज भाव से स्वीकारते हैं कि वर्ष 2015 उनके जीवन के लिए वास्तव में दो-दो यादगार पल लेकर आया है.
बड़े भाई व बहन भी हैं इंजीनियर :संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल करनेवाले प्रशांत कुमार के बड़े भाई पंकज कुमार उत्तराखंड सरकार के पेयजल जलापूर्ति विभाग में सहायक अभियंता, तो बहन ज्योति सिंह बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.
जीवन में सफलता के लिए कोई शॉर्ट कट नहीं होता :संघ लोक सेवा आयोग में सफलता के संबंध में पूछे जाने पर प्रशांत ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए कोई शॉर्ट कट मार्ग नहीं है.
कठिन एवं सतत परिश्रम से ही बेहतर सफलता हासिल की जा सकती है. अपने इंजीनियर पिता व गृहिणी मां के द्वारा अपने बेटे को बेहतर इनसान बनाने का सपना देखा गया था. उसी के मुताबिक, हमें सुविधाएं एवं मार्गदर्शन भी मिलता था. कई गुरुजनों का मार्गदर्शन भी मेरे लिए सफलता का मंत्र बना. इनकी सफलता पर चाचा रामपृत सिंह, रामस्वरूप सिंह, मिथलेश सिंह, ग्रामीण व रिश्ते में भाई संजय सिंह, विनोद सिंह काफी खुश दिखे.

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