छपरा (नगर) : अनियमित रूप से सादी उत्तर पुस्तिका खरीद मामले में जेपी विवि के फाइनांस ऑफिसर सोनेलाल सहनी की निगरानी द्वारा गिरफ्तारी के बाद बुधवार को विवि में सन्नाटा पसरा रहा. वहीं, विवि से लेकर पीजी विभागों में इसी बात की चर्चा जोरों पर रही. एफओ के बाद अब किसका नंबर होगा.
हालांकि कोई भी इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं दिखा. अलबत्ता एफओ की गिरफ्तारी के बाद निगरानी द्वारा आरोपित बनाये गये अन्य पदाधिकारियों के उपर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकनी शुरू हो गयी है. मालूम हो कि निगरानी द्वारा उत्तर पुस्तिका खरीद मामले में जेपी विवि के कुलपति प्रो द्विजेंद्र गुप्ता के साथ ही विवि के एफओ, एफए समेत कुछ सात लोगों के विरुद्ध 30 जनवरी, 2015 को निगरानी थाने में कांड संख्या 10/2015 दर्ज करायी गयी थी.
इसमें कुलपति प्रो द्विजेंद्र गुप्ता के साथ ही विवि के एफओ सोनेलाल सहनी, एफए प्यारे मोहन, क्रय विक्रय समिति सदस्य डॉ अजीत कुमार तिवारी, डॉ अनिता, प्रो सरोज कुमार वर्मा तथा उत्तर पुस्तिका की आपूर्ति करनेवाली सीयूपीएल कंपनी के निदेशक के नाम शामिल हैं.
विभागों में छायी वीरानी
एफओ की गिरफ्तारी की सूचना से जहां विवि के एफओ व एफए कार्यालय में वीरानी छायी रही, वहीं विशेष रूप से विवि के पॉलिटिक्स साइंस, इकोनॉमिक्स तथा हिंदी विभागों में भी सन्नाटा पसरा रहा.
प्राध्यापकों के बीच इसी बात को लेकर चर्चा होती रही कि आगे क्या होगा. मालूम हो निगरानी द्वारा दर्ज प्राथमिकी में विवि के क्रय-विक्रय समिति के सदस्य के रूप में उपरोक्त विभागों में भी प्राध्यापक के नाम शामिल हैं.
गुप्त रूप से हो रहा फाइलों का निबटारा
सूत्रों की मानें, तो जेपी विवि के एफओ की गिरफ्तारी के बाद कुलपति सहित अन्य पदाधिकारी अंडरग्राउंड हो चुके हैं. मालूम हो कि निगरानी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद से कुलपति सहित अन्य पदाधिकारियों की विवि में उपस्थिति काफी कम हो गयी थी. वहीं, विवि की अधिकतर फाइलों का निबटारा भी गुप्त रूप से किया जाने की चर्चा है.
वहीं, क्रय-विक्रय समिति के सदस्यों का भी विभागों में आना काफी कम हो गया था. वैसे चर्चा है कि क्रय-विक्रय समिति के सदस्य मामला तूल पकड़ता देख पहले से ही छुट्टी पर चले गये है.
