बेचैनी में गुजरा सोमवार, चौक-चौराहों और चौपालों में होती रही भूकंप को लेकर चर्चा

छपरा (सारण) : सोमवार की शाम करीब छह बजे एक फिर भूकंप के झटके आये. लोग झटके महसूस कर अपने-अपने घरों से बाहर भागे. सोमवार की रात में भी चैन की नींद नहीं सो पाये. आम से खास लोग रात भर घरों के बाहर ही बैठे-सोये रहे. अधिकतर लोगों ने घरों से बाहर खुले मैदान, […]

छपरा (सारण) : सोमवार की शाम करीब छह बजे एक फिर भूकंप के झटके आये. लोग झटके महसूस कर अपने-अपने घरों से बाहर भागे. सोमवार की रात में भी चैन की नींद नहीं सो पाये. आम से खास लोग रात भर घरों के बाहर ही बैठे-सोये रहे. अधिकतर लोगों ने घरों से बाहर खुले मैदान, खेत, खलिहान, पार्क में अपने परिवार के साथ रात गुजारी.
भूकंप के भय से भयभीत लोग रात भर जागते रहे. घरों के बाहर बीबी -बच्चों के साथ बैठे लोगों ने टेलीविजन पर न्यूज देखते रहे. कहीं-कहीं लोग मनोरंजन कार्यक्रम भी देख कर मुसीबत वाली रात को गुजारा. पहले बच्चे सो गये फिर परिवार के बड़े सदस्य सोये. वृद्धजन बीच-बीच में जागते – सोते रहे. युवा तथा किशोर रात भर मोबाइल पर लगे रहे. फेसबुक तथा व्हाटसएप पर चैटिंग करते रहे. बीच-बीच में लोगों के मोबाइल की घंटियां भी बजती रहीं.
अफवाहों का बाजार रहा गरम : भूकंप आने के अफवाहों का बाजार गरम रहा. लोग एक – दूसरे से यह पूछते रहे कि फिर कब आयेगा.. आप को पता है क्या? कुछ इसी तरह का सवाल सभी लोग एक दूसरे से करते नजर आये. सबसे दिलचस्प स्थिति तब उत्पन्न हो गयी, जब शाम में यह अफवाह उड़ा की चांद उलटा निकला है.
पुलिस प्रशासन ने दिखायी सक्रियता : रात के समय रविवार को पुलिस-प्रशासन सक्रिय रही. शहर के सभी चौक चौराहों पर पुलिस बल के साथ पदाधिकारी भी तैनात थे. रात के समय सदर अनुमंडल पदाधिकारी क्यूम अंसारी तथा सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राज कुमार कर्ण ने क्षेत्र का भ्रमण किया और स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान अधिकारियों ने आमजनों को अफवाहों से बचने की सलाह दी.
आपदा के समय संयम बरतने की अपील : भूकंप सामान्य प्राकृतिक फेनोमिना है, कोई दैवी प्रकोप नहीं. यह पूर्णत: वैज्ञानिक घटना है लिहाजा ऐसे मौके पर संयम, धैर्य और संवेदनशीलता की जरूरत है.
अगर ऐसा नहीं होता, तो भूकंप का केंद्र साक्षात शिव के कैलाश और मानसरोवर वालाक्षेत्र हिंदू राष्ट्र नेपाल नहीं होता. इस बार के भूकंप के बाद जिस तरह सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाये गये, उससे सावधान रहने की जरूरत है. कुछ इसी तरह की बातें आज छपरा के नगरपालिका चौक पर इप्टा के भूकंप की जागरूकता संबंधी गोष्ठी में कही गयी.
गोष्ठी की शुरुआत जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी राजेंद्र मंडल ने भूकंप के समय प्री और पोस्ट उपायों की जानकारी दे कर की. विषय विशेषज्ञ के रूप में जेपीयू पीजी भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ केदारनाथ और पीएन सिंह कॉलेज के प्राध्यापक डॉ मनोज कुमार सिंह ने भूकंप के कारणों पर चर्चा करने के साथ आपदा प्रबंधन के गुर समझाये. डॉ लाल बाबू यादव ने भूकंप को प्राकृतिक घटना बताते हुए इसे दैवी प्रकोप से जोड़ कर देखने की प्रवृत्ति का जोरदार खंडन किया.
बिहार इप्टा के अध्यक्ष मंडल के सदस्य प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव ने अफवाहों से तौबा करने की सलाह दी, वहीं पूर्व मंत्री और भूगोलविद् रवींद्र नाथ मिश्र ने चिंता जतायी की किसी तरह बुद्धिजीवियों ने भी भूकंप को पिकनिक बना दिया. गोष्ठी को सुरभित दत्त, सुपेंद्र नाथ चौधरी, कौसतुभ निहाल, कुमार उज्जवल, अभिजीत कुमार सिंह ने भी संबोधित किया.

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