हाइकोर्ट ने विवि प्रशासन के पक्ष में सुनाया फैसला

राज्य सरकार ने भी लिया यू -टर्न जल्द शुरू होनेवाली है पार्ट वन की परीक्षा छपरा (नगर) : आखिर जेपीविवि के 53 नवस्थापित कॉलेजों में नामांकित हजारों छात्रों के भविष्य को अधर में लटकाने का जिम्मेवार कौन होगा. मालूम हो कि पिछले 16 अप्रैल को जेपीविवि के छात्रों द्वारा हाइकोर्ट में दर्ज याचिका को खारिज […]

राज्य सरकार ने भी लिया यू -टर्न
जल्द शुरू होनेवाली है पार्ट वन की परीक्षा
छपरा (नगर) : आखिर जेपीविवि के 53 नवस्थापित कॉलेजों में नामांकित हजारों छात्रों के भविष्य को अधर में लटकाने का जिम्मेवार कौन होगा. मालूम हो कि पिछले 16 अप्रैल को जेपीविवि के छात्रों द्वारा हाइकोर्ट में दर्ज याचिका को खारिज करते हुए जज द्वारा अपने आदेश में नवस्थापित कॉलजों को मान्यता देने की जिम्मेवारी विवि प्रशासन के पास होने की बात कहते हुए कहा कि मान्यता के अभाव में विवि प्रशासन ही उन कॉलेजों में नामांकित छात्रों की परीक्षा लेने का निर्णय ले.
अब गेंद पूरी तरह से विवि प्रशासन के पाले में डाल दिया गया है. बहरहाल हाइकोर्ट के फैसले से एक बार फिर सारण प्रमंडल अंतर्गत 53 नवस्थापित कॉलेजों में सत्र 2014-15 में स्नातक प्रथम वर्ष में नामांकित छात्रों का भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है.
राज्य सरकार ने भी पाला बदला
उधर, इस मामले में राज्य सरकार ने भी अपना पाला बदल लिया है. मालूम हो कि इतने छात्रों के भविष्य बरबाद होने तथा संभवत: राजनीतिक दबाव के कारण शिक्षा विभाग के अपर सचिव के सेंथिल कुमार द्वारा पिछले वर्ष ही आदेश जारी करते हुए जेपीविवि प्रशासन से नवस्थापित कॉलेजों में सत्र 2014-15 में नामांकन ले चुके छात्रों के भविष्य को देखते हुए विवि प्रशासन को इन छात्रों की परीक्षा लेने का निर्देश दिया था.
हालांकि हाइकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की हो रही किरकिरी पर यू -टर्न लेते हुए विभाग के अपर सचिव ने अपने पूर्व के आदेश को स्थगित करते हुए नये आदेश में बिना संबंधन वाले कॉलेजों द्वारा नामांकन लिये जाने की निगरानी व इस पर फैसला लेने का अधिकार विवि प्रशासन के पास रहने की बात कह मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है.
विवि ने नामांकन पर लगायी थी रोक
सूत्री की मानें तो जेपीविवि के कुलपति प्रो. द्विजेंद्र गुप्ता के आदेश पर विवि के पत्रंक 5269 (आर) दिनांक 20.6.2014 के द्वारा जेपीविवि अंतर्गत एनओसी प्राप्त कुल 53 कॉलेजों में सत्र 2014-15 में स्नातक प्रथम वर्ष में छात्रों के नामांकन पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्देश दिया गया था. हालांकि इसके पूर्व ही बड़ी संख्या में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्रों ने इन कॉलेजों में अपना नामांकन करा लिया था.
नामांकन पर रोक संबंधी आदेश जहां छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया. वहीं कॉलेजों के स्थापना पर भी सवाल खड़ा हो गया है. उधर, एनओसी कॉलेजों की मानें तो उन्हें स्थापना की अनुमति विवि द्वारा गठित निरीक्षण दल की अनुशंसा पर ही दिया गया था. जबकि उन कॉलेजों को सिंडिकेट व सीनेट द्वारा भी अनुमोदित किया गया था.

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