छपरा/दिघवारा : आइपीएल का 8 वां संस्करण गत आठ अप्रैल से आठ टीमों के बीच शुरू हो गया है. आइपीएल शुरू होने के साथ सट्टेबाजी का बाजार गुलजार हो गया है. हर दिन मैचों से पूर्व सट्टेबाजों के बीच मैचों को परिणाम के परिणाम को लेकर सट्टे की बोली लगती है. टीमों व उसके खिलाड़ियों का प्रदर्शन सट्टेबाजों की किस्मत का फैसला करती है. मैच का परिणाम आ जाने पर कोई मालामाल बन जाता है तो कोई कंगाल. किसी की चांदी कटती है तो किसी को चूना लगता है.
टीम पर दावं लगाते हैं सट्टेबाज : सट्टेबाज प्रत्येक मैच में सट्टेबाजी खेलते हैं. टीम पर दावं खेला जाता है. अच्छे खिलाड़ियों से जुड़ी टीम पर खूब बोली लगती है.
500 से लेकर 30 हजार तक की लगती है बोली : प्रत्येक मैच में सट्टेबाजी की बोली सट्टेबाजों की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है. सूत्र बताते हैं कि मैच में प्रतिदिन एक मैच में 500 रुपया से लेकर 30 हजार तक की बोली लगती है.
प्रत्येक दिन 5 से 7 लाख लगता है दावं पर : सूत्र बताते हैं कि जिन इलाकों में सट्टेबाजी का धंधा चरम पर है, वहां सैकड़ों सट्टेबाजों के बीच मैच को लेकर प्रत्येक दिन पांच से सात लाख तक की बोली लगती है. मैच के अगले दिन जीतने व हारनेवालों के बीच राशि की अदायगी होती है.
अभिभावकों की बढ़ जाती है बेचैनी : वैसे युवा वर्ग जो सट्टेबाजी के आदी हो चुके हैं, वैसे युवकों के अभिभावकों की बेचैनी आइपीएल जारी रहने तक बनी रहती है. युवावर्ग अभिभावकों से लुकाछिपी कर सट्टेबाजी खेलते हैं.
दूसरे प्रदेश के सट्टेबाज भी आजमाते हैं किस्मत : आइपीएल में दूसरे प्रदेशों में रहने वाले सट्टेबाज भी राशि दावं पर लगाते हैं. मैच से पूर्व मोबाइल पर राशि तय होती है एवं घर लौटने पर आइपीएल का हिसाब तय होता है.
कैसे लगता है सट्टा, ये भी जानें : मैच से पूर्व सट्टेबाज टीम के परिणाम पर बोली लगाते हैं. मसलन मुंबई व पंजाब के मैचों के बीच अगर कोई सट्टेबाज मुंबई की जीत पर 10 हजार रुपया दावं पर लगाता है और शर्त चार गुना की है, तो जीतने पर उसे 40 हजार की राशि मिलेगी. ऐसे ही सट्टेबाजों के बीच सामने की बातचीत या फिर मोबाइल पर सट्टे की राशि तय होती है. मैच के अगले दिन भुगतान होता है, क्रेडिट पर भी खूब खेल होता है. जीतनेवाले शराब व कबाब का मजा लेकर जश्न मनाते हैं. हारनेवाले भी हिम्मत न हार कर फिर भाग्य आजमाते हैं.
पूर्व के वर्षो का रिकॉर्ड टूटा : इस वर्ष सट्टेबाजी चरम पर है. पूर्व के सभी 7 संस्करणों के मुकाबले इस वर्ष सट्टेबाजी में इजाफा हुआ है, मानों पिछला हर रिकॉर्ड टूट गया हो. हर चौक-चौराहे पर सट्टेबाजी की चर्चा सुनने को मिल रही है.
10 से 15 प्रतिशत ब्याज पर मिलती है राशि : सट्टेबाजों के बीच राशि की उपलब्धता धनी वर्ग के लोग कराते हैं, ऐसे लोग बाहुबल पर राशि वसूलने का मादा रखते हैं. सट्टेबाजों को 10 से 15 प्रतिशत दर पर ब्याज दिया जाता है एवं जीतने पर ब्याज की राशि के साथ मूलधन प्राप्ति के अलावे बख्शिश भी ली जाती है.
कमजोर टीम पर भी लगती है बोली : मजबूत टीमों के अलावे सट्टेबाज कमजोर टीमों पर भी बोली लगाते हैं. कमजोर टीम द्वारा अप्रत्याशित परिणाम देने पर सट्टेबाज मालामाल हो जाते हैं.
आइपीएल के शुरू होने के साथ ही जिले के शहरी क्षेत्रों के अलावे ग्रामीण क्षेत्रों में सट्टेबाजी का बाजार गरम है. हर शाम सट्टेबाजों के बीच लाखों की बोली लगती है. टीमों के खिलाड़ियों का प्रदर्शन सट्टेबाजों की किस्मत का फैसला करती है. सट्टेबाजी में युवावर्ग ज्यादा संख्या में संलिप्त है. मैच के बाद कोई मालामाल हो जाता है, तो कोई कंगाल. आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हुई है. मारपीट व चोरी की घटनाएं बढ़ी है. तेजी से सट्टेबाजों की चांदी रहती है, वहीं उनके अभिभावकों की चैन समाप्त हो गयी है. मैच को लेकर कर्ज देने व कर्ज लेनेवालों की कमी नहीं है.
आइपीएल के सीजन में दूसरे प्रदेशों में रहनेवाले स्थानीय युवक भी कम समय में मालामाल होने का सपना लेकर घर लौट जाते हैं. फिर सीजन भर प्रत्येक मैच में बोली लगा कर राशि दावं पर लगाते हैं. किस्मत के इस खेल में भाग्यशाली की चांदी कटती है, तो दुर्भाग्यशाली सट्टेबाजों को चूना लगता है. आइपीएल 8 में इस बार चल रही सट्टेबाजी ने पूर्व के वर्षो के तमाम रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. आइपीएल अब ‘इंडियन पैसा लीग’ का रूप लेता जा रहा है. प्रस्तुत है यह रिपोर्ट.
केस स्टडी-01
छपरा शहर के महमूद चौक के पास रह कर पढ़ाई कर रहा एक युवक सट्टेबाजी की दलदल में कूद पड़ा. कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह के बीच उसने परिवार के लोगों से छिप कर ब्याज लेकर आइपीएल मैचों में सट्टा खेला. बदकिस्मती साथ न छोड़ी और कर्ज के पैसों को सट्टेबाजी में हार गया. बाद में कर्ज देनेवालों ने जब युवक से राशि की अदायगी का दबाव डाला, तो बात परिजनों तक पहुंची. पंचायत बुलायी गयी, तो हर किसी ने कर्ज के लाखों रुपया को माह वार चुकाने की बात कही.
केस स्टडी-02
सोनपुर के बरबट्टा बाजार का युवक सट्टेबाजी में 20 हजार का रुपया हार गया और जब राशि देने में आनाकानी की, तो उसके विरोधियों ने उसका कीमती मोबाइल छीन लिया. पोल खुलने के डर से युवक ने मोबाइल गिर जाने की बात परिजनों को बता कर थाने में सनहा दर्ज करवा दिया.
इन टीमों पर खूब लगती है बोली
मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, रॉयल चैलेंजर, बेंगलुरु, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स
इन टीमों पर लगती है बोली
सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली डेयरडेविल्स, किंग्स इलेवन पंजाब
जिले में इन प्रखंडों में खूब होती है सट्टेबाजी
दिघवारा, सोनपुर, परसा, दरियापुर, छपरा सदर
क्या कहते हैं शिक्षक
युवकों को कम समय में मालामाल बनाने का सोच त्यागते हुए कैरियर पर ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य संवर सके.
बबलू पांडेय, शिक्षक, सैदपुर, दिघवारा
क्या कहते हैं थानाध्यक्ष
अगर किसी व्यक्ति को थाना अधीन क्षेत्रों में सामूहिक सट्टेबाजी की सूचना मिलती है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दे. सट्टेबाजों के खिलाफ कार्रवाई होगी.
लाल बहादुर
दिघवारा, थानाध्यक्ष
थाना अधीन क्षेत्रों में सामूहिक सट्टेबाजी की कोई सूचना नहीं है. बिना सबूत के सट्टेबाजों के खिलाफ कार्रवाई कै से संभव है. अगर किसी के द्वारा सट्टेबाजी का प्रमाण मिलता है, तो सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई होगी.
कपूरनाथ शर्मा, सोनपुर, थानाध्यक्ष
सट्टेबाजी का खेल कानून अपराध है. जिले में अगर ऐसी गतिविधि हो रही है, तो कार्रवाई की जायेगी. आमजन से भी अपील है कि वे सूचना दें. सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया जायेगा.
सत्यवीर सिंह, एसपी, सारण
