छपरा (सारण) : शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र के सीमांकन के पेच में एक हजार से अधिक दस्तावेजों की डिलिवरी फंसा हुआ है. इससे भूमि लिखवानेवालों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. छपरा सदर अंचल के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के करीब आधा दर्जन वैसे मौजा हैं, जिनका आधा क्षेत्र शहरी व आधा क्षेत्र ग्रामीण इलाके में पड़ता है.
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण इलाकों में पड़ने वाली भूमि की बिक्री का न्यूनतम दर अलग-अलग निर्धारित है और निबंधन कर आदि भी अलग-अलग उसी के अनुपात में सरकार ने तय की है. इस क्षेत्र में भूमि खरीदनेवालों की सबसे बड़ी समस्या है कि दस्तावेज की डिलिवरी नहीं की जा रही है. दस्तावेज की डिलिवरी नहीं होने के कारण भूमि खरीदनेवाले लोग अपनी भूमि पर दखल-कब्जा नहीं कर पा रहे हैं और भूमि की दाखिल-खारिज भी नहीं करा पा रहे हैं. विधि व्यवस्था की समस्या होती है. करीब छह माह के अंदर करीब दो दर्जन भूमि को लेकर हिंसक झड़प हो चुकी है.
नगर पर्षद नहीं दे रहा है प्रमाणपत्र : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मौजों की भूमि के बारे में नगर पर्षद के द्वारा यह प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है कि भूमि शहरी क्षेत्र में नहीं है. नगर पर्षद के द्वारा एक अगस्त, 2014 तक प्रमाणपत्र निर्गत किया गया, जिसके बाद से प्रमाण नहीं दिया जा रहा है. निबंधन कार्यालय के द्वारा सदर अंचल से भी संयुक्त मौजा के खेसरा की विवरणी मांगी गयी है, जिसे उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. इस वजह से जमीन खरीदने व बेचने वालों की परेशानी बढ़ गयी है.
