छपरा (सदर) : भीषण गर्मी तथा अल्पवृष्टि के कारण भूमिगत जलस्रोतों के सूखने के साथ-साथ जल संकट गहराता जा रहा है. जल संकट से निबटने तथा पुराने जल स्रोतों को पुन: चालू करने तथा संग्रह के उद्देश्य से पीएचइडी के प्रधान सचिव ने सारण में 20 कुओं की उड़ाही का निर्देश पीएचइडी को दिया है.
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के दिनों में जल संग्रह के साथ-साथ भूमिगत जलस्रोत को बढ़ाया जा सके. इसे लेकर पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता किशुनदेव दिसवा की देखरेख में कुआं उड़ाही का कार्य बुधवार को शुरू हो गया. लगातार जलसंकट से जूझ रहे विभिन्न 27 स्थानों पर पीएचइडी के द्वारा टेंकर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है.
कार्यपालक अभियंता के अनुसार लगातार पेयजल आपूर्ति बनाये रखने के उद्देश्य से आपदा प्रबंधन के एक सौ चापाकल गाड़े गये हैं. वहीं शेष योजना के तहत 38 चापाकल जहां गाड़े गये, वहीं 579 चापाकलों की मरम्मत की जा सकी है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या का समाधान किया जा सकेगा.
एक माह में छह इंच घटा जल स्तर : सारण जिले में अल्पवृष्टि एवं भूमिगत जलस्रोतों के सूख जाने के कारण भू-जल स्तर काफी तेजी से नीचे जा रहा है. पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता के अनुसार विगत एक माह में भूमिगत जल स्तर छह इंच नीचे गया है. सारण जिले का औसत जल स्तर 21 फुट दो इंच है. वहीं अधिकतम जल स्तर 30 फुट दो इंच तथा न्यूनतम जल स्तर 19.1 इंच है.
हालांकि सोनपुर प्रखंड में जल स्तर में अब वृद्ध हो रही है. वहीं सबसे खराब स्थिति गड़खा, अमनौर, मांझी, जलालपुर, नगरा, मशरक आदि प्रखंडों की है. नदी के किनारे अवस्थित प्रखंडों में ग्रामीणों द्वारा परंपरागत चापाकल के बदले नयी क्वालिटी के चापाकल लगाये जाने के कारण जलापूर्ति की समस्या कम है.
