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आज मनाया जायेगा त्याग और बलिदान का त्योहार बकरीद
छपरा : बकरीद 22 अगस्त को मनायी जायेगी. एक ओर जहां ईद का त्योहार प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है तो बकरीद अपने कर्तव्य को निभाने का और अल्लाह के प्रति अपने विश्वास को कायम रखने का पर्व है. इन सब के अलावा बकरीद कुर्बानी का दिन भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है.
कुर्बानी के पीछे क्या है मान्यता
बकरों की कुर्बानी देना अल्लाह द्वारा मुसलमानों के लिए वाजिब माना गया है. इस्लाम में कुर्बानी देने के पीछे एक कहानी छिपी हुई है. इसमें अल्लाह द्वारा हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को अपनी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी करने का आदेश दिया गया. उनकी उम्र 80 साल की थी और वे उसी उम्र में पिता बने थे. उनके लिए बेटे से अजीज चीज दूसरी और कोई नहीं थी. अल्लाह का यह आदेश उनके लिए एक इम्तिहान जैसा था. ऐसे में उन्होंने अल्लाह के हुक्म को माना और बेटे को अल्लाह की रजा के लिए कुर्बान करने को राजी हो गये. उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और बेटे की गर्दन पर जैसे ही छुरी चलाने लगे, वैसे ही अल्लाह ने बेटे की जगह एक बकरे को उससे बदल दिया. अल्लाह को इब्राहिम का त्याग का यह जज्बा काफी पसंद आया और उन्होंने हर साहिबे हैसियत पर कुर्बानी करना वाजिब कर दिया.
त्याग और बलिदान का देता है संदेश : कुर्बानी दरअसल त्याग और बलिदान का प्रतीक है. इसके द्वारा सबसे पहले अपने मोह को त्यागने का प्रयास किया जाता है. अल्लाह के प्रति अपने त्याग और कर्तव्य निभाने में किसी प्रकार की हिचक और कोताही को दिल से निकालने का प्रयास होता है. वहीं कुर्बानी के गोश्त का तीन भाग रिश्तेदारों और गरीबों में बांट देने के पीछे मजबूरों की मदद करने का संदेश और सीख होती है.
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