दिघवारा : किस्मत के आगे किसी की एक नहीं चलती है और होता वहीं है, जो किस्मत में लिखा है. वरना किसे पता था कि जिस दिन घर में बेटी के फलदान जाने की तैयारी हो रही होगी, उसी दिन उसके पिता का शव घर पहुंचेगा और खुशी का मौका क्रंदन के माहौल में बदल जायेगा. जी हां, दिघवारा थाना क्षेत्र के बरूआ निवासी विजय प्रसाद (45 वर्ष) जो दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करते थे, वे अपनी बड़ी बेटी प्रियंका के विवाह से पूर्व शुक्रवार को जाने वाले फलदान कार्यक्रम में शरीक होने के लिए दिल्ली से डाउन लिच्छवी एक्सप्रेस से अपने घर के लिए रवाना हुए. उनको शीतलपुर स्टेशन उतरना था,
मगर स्टेशन से पहले ही उनको नींद लग गयी और रात्रि लगभग 8:30 बजे जब उक्त ट्रेन शीतलपुर स्टेशन से खुली तो उनकी नींद टूटी. हड़बड़ाहट में उसने ट्रेन से उतरने का प्रयास किया तो चलती ट्रेन की चपेट में आ गये, जिससे उनके दोनों पैर कट गये. नाजुक स्थिति में उसे बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती करवाया गया, जहां शुक्रवार की सुबह जीवन और मौत से संघर्ष करते हुए आखिरकार विजय की मौत हो गयी. उसके मौत की खबर मिलते ही उसके घर में परिजनों के बीच कोहराम मच गया. खुशी का माहौल पल में गमगीन बन गया था. पत्नी कलावती देवी, पुत्री प्रियंका व कंचन और पुत्र आशीष व भोला का रो-रो कर बुरा हाल था. बेटी के फलदान की तैयारी छोड़ घरवाले विजय के अंतिम संस्कार में जुटे दिखे. हर लोग की जुबान पर परिवार की बदकिस्मती की चर्चा थी तो मृतक के घर सांत्वना देने वाले लोगों का तांता लगा था.
