छपरा (नगर) : आस्था, समर्पण, श्रद्धा और भक्ति ऐसे शब्द छठ जैसे महान पर्व में अपनी सार्थकता सिद्ध करते नजर आ रहे हैं. शहर हो या गांव हर व्यक्ति लोक आस्था के इस पर्व में डुबकी लगाकर स्वयं को पवित्र करने की होड़ में लगा है. बुधवार को छपरा के बाजारों में बिखरी महापर्व की रौनक ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि छठ ही एकमात्र ऐसा पर्व है जहां जाति-धर्म के बंधन को तोड़ हर कोई तत्परता के साथ अपनी भूमिका निभाने के लिए आतुर दिखता है.
छपरा के साहेबगंज, मौना चौक, सरकारी बाजार, गुदरी बाजार, साढ़ा, भगवान बाजार, थाना चौक, गांधी चौक या यूं कहें कि शहर के प्रायः सभी प्रमुख बाजारों में नारियल, केला, अरुई, गागल, ईख, मूली आदि सभी प्रकार के फल तथा कलसुप व दउरा से सजी दुकानों पर खरीदारों की भीड़ ने सूर्योपासना के इस पर्व का उत्साह दोगुना कर दिया. गरीब-अमीर, ऊंच-नीच, जाति-धर्म का भेद मिटाकर हर कोई उमंग के साथ खरीदारी में जुटा था.
