मां अंबिका के दरबार में उमड़ती है भक्तों की भीड़
दिघवारा : मां अंबिका का प्राचीन मंदिर दिघवारा प्रखंड के रामपुर आमी पंचायत के आमी गांव में स्थित है. इसी गांव में गंगा नदी के किनारे अत्यंत ऊंचे टीले पर मां अंबिका देवी का प्राचीन मंदिर है, इसमें देवी की पिंडी जैसी मिट्टी की प्रतिमा स्थापित है. वि मां अंबिका का यह प्राचीन मंदिर प्रजापति […]
दिघवारा : मां अंबिका का प्राचीन मंदिर दिघवारा प्रखंड के रामपुर आमी पंचायत के आमी गांव में स्थित है. इसी गांव में गंगा नदी के किनारे अत्यंत ऊंचे टीले पर मां अंबिका देवी का प्राचीन मंदिर है, इसमें देवी की पिंडी जैसी मिट्टी की प्रतिमा स्थापित है. वि मां अंबिका का यह प्राचीन मंदिर प्रजापति राजा दक्ष के यज्ञ-स्थल पर अवस्थित माना जाता है.
यहीं पर माता सती अपने पति भगवान शिव का निरादर होने के कारण यज्ञ के हवन कुंड में कूदकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली. भगवान शिव को जब इस घटना की जानकारी मिली, तो वे अत्यंत क्रोधित हो उठे और सती के शव को हवन कुंड से निकालकर कंधे पर रख कर तांडव नृत्य करने लगें, जिससे प्रलय की आशंका उत्पन्न हो गयी.
तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के शरीर को टुकड़े-टुकड़े में विभक्त कर दिया और जहां-जहां सती के अंग गिरे वे स्थान शक्तिपीठ कहलाये. परंतु, हवन कुंड में जलते समय मां सती के शरीर का भस्म आमी में रह गया था, जिस कारण यह स्थान सिद्ध-शक्तिपीठ अंबिका स्थान आमी के नाम से मशहूर हुआ.
मार्केंडेय पुराण तथा दुर्गा सप्तशती में वर्णित है कि कालांतर में राजा वैश्य ने मिट्टी की भगाकार पिंड बनाकर इसी स्थान पर तीन वर्ष तक पूजा की थी, तब देवी ने प्रकट होकर उन्हें मनचाहा वरदान दिया. इस मंदिर में विशाल पिंड हैं ,जो आज भी विद्यमान है. दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालु इसी पिंड की पूजा करते हैं. इस सिद्धशक्ति पीठ में मन से मां की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की हर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. ऐसे हमेशा यहां भीड़ रहती हैं, परंतु शारदीय नवरात्र में मंदिर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहता है. शारदीय नवरात्र में प्रदेश के कई जिलों के श्रद्धालु मां की आराधना करने यहां पहुंचते हैं. मंदिर में शारदीय नवरात्र भर देर रात मां के पिंडी रूप की पूजा के साथ भव्य आरती होती है. नवरात्र की सप्तमी,अष्टमी व नवमी को लाखों श्रद्धालु मां का दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं. नवमी को हवन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है.