छपरा(कोर्ट) : व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता रमेंद्र कुमार शर्मा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दिये जाने के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न उठने लगे हैं. 26 रोज पूर्व हुए अधिवक्ता की हत्या मामले में स्थानीय पुलिस नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी की बात तो दूर इतने दिन बीतने के बावजूद कोर्ट से उनके विरुद्ध गिरफ्तारी का वारंट भी निर्गत नहीं करा पायी है.
लचर कार्यशैली तथा आवश्यक खानापूर्ति व कागजातों को प्रस्तुत नहीं करने के कारण कोर्ट उनके आवेदन पर अबतक कोई आदेश नहीं दे पाया है. मामले के आइओ द्वारा घटना के एक दिन बाद ही गिरफ्तारी वारंट के लिए आवेदन तो दे दिया गया, परंतु उससे जुड़े आवश्यक कागजातों को प्रस्तुत नहीं किया गया. जिसका नतीजा, वारंट पर आदेश नहीं हो पाया है.
जानकारों की माने तो स्थानीय पुलिस और कांड के आइओ द्वारा जानबूझ कर विलंब किया जा रहा है, ताकि नामजद अभियुक्तों जो फिलवक्त बाहर हैं, को एक तरह से मोहलत मिल जाये कि वे इस बीच निचली या फिर उच्च न्यायालय से अपना अग्रिम जमानत करवा सकें. विदित हो कि अधिवक्ता ने अपने जीवन काल में ही स्थानीय पुलिस पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए एसपी से डीजी तक के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आवेदन लिखा था. इधर नामजद अभियुक्तों में चार के द्वारा जिला जज रमेश तिवारी के कोर्ट में अग्रिम जमानत प्राप्त करने का प्रयास किया गया , जिसमे जज ने दो के आवेदन को खारिज कर दिया, वहीं दो की याचिका पर सुनवाई चल रही है जिसमें आदेश आना बाकी है. लोगों का मानना है कि नये एसपी के आने से मामले की जांच व अन्य कार्रवाई में तेजी आयेगी. विदित हो कि 13 जुलाई को अधिवक्ता शर्मा की छपरा गड़खा रोड पर उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.जब वे अपनी मोटरसाइकिल से कोर्ट आ रहे थे. इस मामले में मृतक के समधी द्वारा दस लोगों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी.
