छपरा (सदर) : नवगठित छपरा नगर निगम के वार्डों की पुर्नगठन के मामले में अनियमितता के मामले में पटना उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अभी भी चुनाव के निर्धारित तिथि पर संपन्न होने को लेकर असमंजस की स्थिति कायम है.
पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह ने इस मामले में दायर सीडब्लूजेसी 9156/2017 में सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग तथा राज्य सरकार को काउंटर एफीडेबिट देने का निर्देश दिया है. साथ ही सुनवाई के दौरान सारण के जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह डीएम हरिहर प्रसाद की उपस्थिति में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पुर्नगठन के मामले में अनियमितता एवं मानकों को नजर अंदाज करने की बात को सही पाया, वहीं वादी के अधिवक्ता डॉ आलोक कुमार सिन्हा के अनुसार कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 25 जुलाई को निर्धारित किया है.
25 जुलाई के कोर्ट के निर्णय के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
पुनर्गठन में अनियमितता के साथ-साथ मतदाता सूची में भारी अनियमितता से भी प्रशासन कटघरे में : पूर्व में निर्वाचन आयोग के मानक को नजर अंदाज कर मनमाने ढंग से आदर्श जनसंख्या के मानकों को नजरअंदाज करने के साथ-साथ विभिन्न वार्डों में मतदाता सूची से सैकड़ों लोगों के नाम हटाये जाने का मामला प्रशासन के लिए मुश्किल साबित हो रहा है.
शहर के वार्ड नंबर 10-11 के 200 मतदाताओं के नाम वार्ड नंबर 10-11 से मनमाने ढंग से गायब कर देने तथा मतदाताओं के नाम उनके क्षेत्र के बदले दूसरे क्षेत्र की मतदाता सूची में डाल देने को लेकर भी मतदाताओं में नाराजगी है. वार्ड नंबर 10 के वार्ड आयुक्त साहेब हुसैन ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ एक ओर जहां डीएम कार्यालय के समक्ष मतदाता सूची में बरती गयी अनियमितता को सुधारने की मांग की थी. साथ ही यह भी कहा है कि यदि जिला पदाधिकारी ने उनकी मांगों को नहीं माना, तो अंतत: वे 18 जुलाई को जिला प्रशासन के समक्ष आत्मदाह करेंगे. पूर्व वार्ड आयुक्त साहेब हुसैन के आत्मदाह की धमकी को लेकर जिला प्रशासन भी सतर्क है.
इस मामले में जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों ने घटना को लेकर प्रयाप्त पुलिस एवं मजिस्ट्रेट की तैनाती का निर्देश दिया है जिससे किसी भी स्थिति में अप्रिय हादसा न हो. उधर नगर निगम के 45 वार्डों में से लगभग एक दर्जन वार्डों में से मतदाताओं का नाम संबंधित वार्ड से एक साजिश के तहत भारी संख्या में हटाने तथा निवास वाले वार्ड के बदले दूसरे वार्ड में जोड़ देने की कार्रवाई से आमजनों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है.
इसी प्रकार वार्ड नंबर 22 के 142 मतदाताओं के नाम भी संबंधित वार्ड से हटा कर दूसरे वार्ड में दे दिया गया है. ऐसी स्थिति में मतदाता अपने मताधिकार को लेकर चिंतित है. उनका कहना है कि वे चाह कर भी जिस वार्ड में रहते है उस वार्ड के उम्मीदवार को वोट नहीं दे पायेंगे. ऐसी स्थिति में अगले पांच वर्षों तक संबंधित वार्ड आयुक्त के उपेक्षा का शिकार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
