छपरा : देश में हर वर्ष लगभग 9 लाख युवाओं का कौशल उन्नयन करने वाली देश भर में संचालित तेरह हजार आइटीआइ संस्थानों के उत्कृष्टता के लिए संस्थान, प्रशिक्षण में पारदर्शिता के साथ प्रशिक्षकों के स्तर में भी सुधार की कवायद तेज कर दी गयी है.
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को मानक स्तर पर लाने के लिए उसमें व्यापक सुधार और उनके स्तर पर संशोधन, परिवर्धन के लिए केंद्रीय स्तर पर प्रयास जारी है.
इसी के तहत मंगलवार को केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सह स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी के साथ डीजीइटी के राज्यस्तरीय निदेशकों ने विचार-विमर्श किया. बैठक के दौरान अधिकारियों की तरफ से कई सुझाव भी आये और बेहतर निष्कर्ष भी निकले.
इसका परिणाम अगले कुछ महीनों में औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों के स्तर पर छपरा समेत देश भर में नजर आयेगा. केंद्रीय मंत्री रूडी ने बताया कि भविष्य में प्रशिक्षण में पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं. केंद्रीय कौशल विकास मंत्री रूडी ने कहा कि जिस प्रकार पिछली सदी आइआइटी की थी, ठीक उसी प्रकार वर्तमान सदी आइटीआइ की है. इसको पूरी तरह साकार करने के लिए कौशल विकास विभाग निरंतर प्रयत्नशील है. रूडी ने कहा कि देश भर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की ग्रेडिंग की जायेगी. इससे प्रशिक्षणार्थियों को पता चलेगा कि वह किस स्तर के संस्थान में प्रशिक्षण ले रहे हैं.
इससे संस्थानों व और प्रशिक्षणार्थियों के बीच पारदर्शी संबंध भी स्थापित होगा, जो कालांतर में विकासहित में उचित है. उन्होंने कहा कि सरकार आइटीआइ संस्थानों में पढ़ने वालों छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने जा रही है.
इसके लिए इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अलग शिक्षा बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि यहां से मिलने वाले सर्टिफिकेट की दसवीं और बारहवीं के समान ही मान्यता होगी. इन सुधारों के बाद संस्थानों के व्यवस्थित क्रियान्वयन के साथ प्रशिक्षणार्थियों को उनकी आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देने में सहूलियत ही नहीं, बल्कि संस्थान का स्पष्ट प्रलेखित प्रणाली के साथ और अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी संचालन भी होगा.
