उग्रवाद पीड़ितों के बच्चों को मिलेगी सहायता राशि
छपरा (सदर) : जिला प्रशासन के संबंधित पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण ही विगत तीन से चार वर्षों से जिले के विभिन्न प्रखंडों के 27 बच्चे, जिनके पिता असम के तीनसुकिया में उग्रवादी हिंसा में मारे गये थे. उन्हें सहायता राशि मिलना बंद हो गया है या मिलना शुरू ही नहीं हुआ है. इसे लेकर […]
छपरा (सदर) : जिला प्रशासन के संबंधित पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण ही विगत तीन से चार वर्षों से जिले के विभिन्न प्रखंडों के 27 बच्चे, जिनके पिता असम के तीनसुकिया में उग्रवादी हिंसा में मारे गये थे. उन्हें सहायता राशि मिलना बंद हो गया है या मिलना शुरू ही नहीं हुआ है.
इसे लेकर बुधवार को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान के पदाधिकारी ने प्रशासन के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक में राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भावना प्रतिष्ठान के पदाधिकारी रविशंकर त्रिपाठी ने स्थानीय सर्किट हाउस में वरीय उप समाहर्ता मो उमैर, जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक भाष्कर प्रियदर्शी, एकमा, बनियापुर, छपरा सदर तथा दरियापुर के सीओ के साथ समीक्षा के दौरान कही.
समीक्षा के बाद पदाधिकारी रविशंकर त्रिपाठी ने 15 दिनों के अंदर चारों प्रखंड बनियापुर, एकमा, छपरा सदर, डेरनी के 23 बच्चों को मिलने वाली सहायता राशि के संबंध में सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने पर जोर दिया. जिससे उन्हें सहायता राशि प्रदान की जा सकी .
असम के तिनसुकिया में उग्रवादी हिंसा के शिकार बच्चों को मिलेगी सुविधा
प्रशासन के साथ समीक्षा में विभिन्न कागजातो के संबंध में हुई चर्चा
हिंसा के शिकार बच्चों को हर हाल में यथाशीघ्र राशि उपलब्ध कराने का निर्देश
समीक्षा के दौरान यह बात सामने आयी की बनियापुर के चकपिर तथा पिठौरी गांव के आठ बच्चों को एक अप्रैल 2014 से, एकमा के भुइली गांव के 15 बच्चों को एक अप्रैल 2016 से, डेरनी के ककरहट गांव के मृत हरेंद्र सहनी के पुत्र जयकिशोर सहनी, बुन्नी कुमारी को अप्रैल 2012 से, छपरा सदर के ओम श्रीवास्तव को अप्रैल 2016 से सहायता राशि नहीं मिली है. इन सभी बच्चों को सरकार के प्रावधान के अनुसार, 12 वीं कक्षा तक पढ़ाई के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये के हिसाब से, स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई के लिए 1250 रुपये प्रति माह तथा किसी भी व्यावसायिक कोर्स में यदि पीड़ित परिवार के बच्चे पढ़ते है तथा उनकी उम्र 25 वर्ष से कम है, तो उन्हें 15 सौ रुपया प्रतिमाह के हिसाब से सहायता राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है. परंतु, स्थानीय संबंधित पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण तीन से चार-चार वर्षों से इन पीड़ित परिवारों के बच्चों के कागजात के संबंध में पत्राचार नहीं करने तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिये जाने के कारण राशि का आवंटन बंद था. इस मामले को लेकर एकमा के भुइली गांव की पीड़ित परिवार की महिला पार्वती देवी ने सरकार एवं सरकार के गृह मंत्रालय को पत्राचार किया था, जिसके आलोक में ही गृह मंत्रालय के पदाधिकारी ने छपरा पहुंच कर पूरी स्थिति की जानकारी ली. गृह मंत्रालय के निर्देश पर पहुंचे पदाधिकारी रविशंकर त्रिपाठी ने कहा कि वे पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए जायेंगे. उधर दिल्ली से गृह विभाग के निर्देश पर पहुंची टीम के छपरा पहुंच कर समीक्षा के बाद विभिन्न गांवों के हिंसा के शिकार परिवार के बच्चों को एक बार फिर सहायता राशि मिलने की उम्मीद जगी है.