समस्तीपुर से गिरिजा नन्दन शर्मा की रिपोर्ट
Samastipur News: समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर स्थित उगना महादेव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मिथिला की आस्था, भक्ति और लोकसंस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता है. यहां भगवान शिव और उनके परम भक्त महाकवि विद्यापति की अनोखी कथा आज भी लोगों की श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
भक्त और भगवान की अनोखी कथा
मान्यता है कि मिथिला के महान कवि विद्यापति भगवान शिव के अनन्य भक्त थे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ‘उगना’ नाम धारण कर उनके सेवक बनकर रहने लगे थे. लंबे समय तक यह रहस्य छिपा रहा, लेकिन एक घटना के बाद जब सच्चाई सामने आई तो भगवान शिव अंतर्ध्यान हो गए. कहा जाता है कि इस घटना से विद्यापति गहरे दुख में डूब गए थे.
मां गंगा के दर्शन की इच्छा लेकर निकले थे विद्यापति
उगना से वियोग के बाद महाकवि विद्यापति मां गंगा के दर्शन की इच्छा लेकर मिथिला के गंगा तट की ओर निकल पड़े. यात्रा के दौरान जहां उन्होंने विश्राम किया, वहीं उनका अंतिम समय आया. लोककथाओं के अनुसार, कवि की पुकार सुनकर मां गंगा स्वयं प्रकट हुईं और उन्हें अपने आंचल में समा लिया.
आस्था का प्रतीक बना अंकुरित शिवलिंग
किंवदंती है कि उसी स्थान पर बाद में भगवान शिव के रूप में अंकुरित सिला प्रकट हुई, जिसे आज उगना महादेव मंदिर के रूप में पूजा जाता है. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मिथिला की संस्कृति और साहित्य से जुड़ा खास स्थल
उगना महादेव मंदिर मैथिली साहित्य, लोकसंस्कृति और शिवभक्ति परंपरा से जुड़े लोगों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साहित्य प्रेमी पहुंचते हैं.
