Samastipur News: जिले में कानून व्यवस्था और पुलिसिया तफ्तीश पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है. हलई थाना क्षेत्र के नून नदी बांध पर शिक्षक चितरंजन दास की सरेआम हुई हत्या के डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. 5 नवंबर 2024 की वह शाम, जब पूरा इलाका छठ महापर्व की खुशियों में डूबा था, अपराधियों ने एक शिक्षक की जान लेकर परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया.
न लूट, न डकैती… सिर्फ जान लेना था मकसद
इस हत्याकांड में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अपराधियों ने लूटपाट की कोशिश तक नहीं की. शिक्षक की बाइक और मोबाइल घटनास्थल पर सुरक्षित मिले, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि शूटर केवल चितरंजन की हत्या करने के इरादे से आए थे. वारदात के बाद डीएसपी से लेकर डीआईजी तक के आला अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और ‘वैज्ञानिक अनुसंधान’ का भरोसा दिया, लेकिन धरातल पर नतीजा आज भी सिफर है.
तीन थानेदार बदले, पर सुराग एक भी नहीं
पिछले डेढ़ सालों में हलई थाने की कमान तीन अलग-अलग अधिकारियों के हाथ में रही. तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार सिंह ने शुरुआती जांच की और साक्ष्य जुटाए. उनके बाद राहुल कुमार ने कमान संभाली और मामले को सुलझाने के दावे किए. वर्तमान में थानाध्यक्ष शैलेश कुमार जांच को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन हत्यारों का कोई पता नहीं है. अधिकारियों के इस फेरबदल के बीच न्याय की फाइलें धूल फांक रही हैं.
सवाल: क्या पुलिस के पास जवाब है?
आज शिक्षक का परिवार बेबस और लाचार है. उनकी पथराई आंखें पुलिसिया तंत्र से बस एक ही सवाल पूछ रही हैं कि आखिर चितरंजन की खता क्या थी? क्या बिहार पुलिस अपराधियों से हार मान चुकी है या फिर इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री के पीछे कोई बड़ा रसूखदार हाथ है? डेढ़ साल की देरी न्याय प्रणाली पर एक गंभीर सवाल है.
समस्तीपुर से मनोज वर्मा की रिपोर्ट
