Samastipur News: एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं समस्तीपुर जिले के सरकारी आंकड़े इसकी पोल खोल रहे हैं. जिले में आज भी 161 नव सृजित प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जो पूरी तरह से भूमिहीन और भवनहीन हैं. कागजों पर स्कूल तो खुल गए, लेकिन नौनिहालों को बैठने के लिए न तो दो गज जमीन मिली और न ही सिर छुपाने को छत.
समस्तीपुर ब्लॉक में सबसे बुरा हाल, कागजों पर दौड़ रही शिक्षा
आंकड़ों के अनुसार सबसे भयावह स्थिति समस्तीपुर प्रखंड की है, जहाँ कुल 34 विद्यालय भवनहीन और भूमिहीन हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के कुल 161 चिन्हित विद्यालयों में से केवल 96 के पास ही भूमि उपलब्ध हो पाई है. मानक के अनुरूप (न्यूनतम 10 डिसमिल) जमीन की बात करें तो यह संख्या घटकर मात्र 69 रह जाती है. वर्तमान में 156 विद्यालय ऐसे हैं जो बिना किसी सरकारी भवन के खुले आसमान या पेड़ की छांव में जैसे-तैसे चल रहे हैं.
असुरक्षित स्थानों पर स्कूल चलाने पर नपेंगे एचएम और बीईओ
इधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी जमालुद्दीन ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने आदेश जारी कर ऐसे सभी भूमिहीन और भवनहीन स्कूलों को तत्काल नजदीकी सरकारी विद्यालयों से संबद्ध (टैग) कर संचालित करने का निर्देश दिया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि असुरक्षित स्थानों या खुले आसमान के नीचे स्कूल संचालन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाध्यापक और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की होगी.
समस्तीपुर से प्रकाश कुमार की रिपोर्ट
