समस्तीपुर: शहर की बढ़ती आबादी के बीच मोहनपुर पावर ग्रिड की लचर व्यवस्था ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं. उचित देखरेख और रखरखाव के अभाव में ग्रिड की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. बिजली उपलब्ध होने के बावजूद आपूर्ति प्रभावित होने से शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है.
‘जुगाड़ तकनीक’ पर टिकी है बिजली व्यवस्था
हाल ही में मोहनपुर ग्रिड में सर्किट जलने की गंभीर घटना सामने आयी थी. इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ‘ई’ पावर हाउस को सुधा फीडर के 33 केवी से और लगुनियां पीएसएस को रेलवे फीडर से जोड़कर बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया गया.
हालांकि, यह वैकल्पिक व्यवस्था भी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है. स्थिति यह है कि सुधा फीडर में मामूली फॉल्ट आने पर ‘ई’ पावर हाउस की बिजली गुल हो जाती है. वहीं, ‘ई’ पावर हाउस के 33 केवी का शटडाउन लेने पर पूरा सुधा फीडर प्रभावित हो जाता है. इससे बिजली आपूर्ति की तकनीकी पेचीदगियां और बढ़ गयी हैं.
मोहनपुर ग्रिड से जुड़े अन्य फीडरों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही बनी हुई है. इसके कारण फॉल्ट और तकनीकी समस्या होने पर बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है.
शहर का दायरा बढ़ा, लेकिन ग्रिड का नहीं हुआ आधुनिकीकरण
विद्युत विभाग के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि शहर का दायरा और उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसके बावजूद उसी अनुपात में ग्रिड के आधुनिकीकरण और जीर्णोद्धार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
आए दिन ग्रिड में फॉल्ट के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आती है. स्थानीय स्तर पर लोगों का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.
समय रहते व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत
मोहनपुर पावर ग्रिड की मौजूदा व्यवस्था को लेकर शहरवासियों में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि बढ़ती आबादी और बिजली उपभोक्ताओं की संख्या को देखते हुए ग्रिड की क्षमता और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है.
यदि समय रहते ग्रिड का आधुनिकीकरण और रखरखाव कर व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति का संकट और गंभीर हो सकता है.
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