Samastipur News:मधुमेह रोगियों के लिए मिलेट्स बेहतर विकल्प : डॉ मिश्रा

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ श्वेता मिश्रा ने बताया कि बिहार में श्री अन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी की तैयारी, बीज चयन, बुवाई की तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाई जाती है.

Samastipur News: पूसा : डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ श्वेता मिश्रा ने बताया कि बिहार में श्री अन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी की तैयारी, बीज चयन, बुवाई की तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाई जाती है. इसमें मुख्य रूप से शून्य जुताई व सीधी बुवाई शामिल हैं. इन तकनीकों का महत्व श्री अन्न के उच्च पोषण मूल्य कम पानी की आवश्यकता व जलवायु-प्रतिरोधी क्षमता में निहित है. यह पारंपरिक फसलों के लिए एक टिकाऊ और स्वास्थ्यप्रद विकल्प बनाता है. उन्होंने बताया कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले, रोग-प्रतिरोधी और जल्दी पकने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए. धान की फसल के बाद बिना जुताई किए सीधे गेहूं, चना या सरसों की बुवाई की जाती है. जिससे लागत और श्रम कम होता है. खरीफ मौसम में धान, मक्का और सोयाबीन के साथ-साथ बाजरा की सीधी बुवाई की जाती है जो मिट्टी के स्वास्थ्य और जल दक्षता में सुधार करती है. फसल अवशेषों से मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी संरक्षित रहती है. खरपतवार नियंत्रण होता है. जैविक खादों का उपयोग श्री अन्न की गुणवत्ता और उपज में सुधार कर सकता है. श्री अन्न प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो गेहूं और चावल से भी बेहतर हैं. वे ग्लूटेन-मुक्त होते हैं. जिससे सीलिएक रोग या मधुमेह वाले लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प है. किसानों की आय में वृद्धि होती है. श्री अन्न की मांग बढ़ने से किसानों को आर्थिक रूप से लाभ होता है. बिहार सरकार श्री अन्न को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है.

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By Ankur kumar

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