पूसा . डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के सभागार में बटन मशरूम उत्पादन तकनीकी विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ. अध्यक्षता करते हुए निदेशक अनुसंधान डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि किसानों के सहयोग से ही शोध किये गये नवीनतम प्रभेद का बीज एवं तकनीकी ज्ञान को खेत तक पहुंचाना संभव है. रासायनिक खादों के प्रयोग से उत्पादन एवं उत्पादकता दर को बढ़ाने में किसानों को कामयाबी मिली है. इसके साथ ही देशभर के लोगों के परिवार में अधिकाधिक रोगों की तादाद बढ़ गई है. इससे निबटने के लिए अब किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ मुखातिब होने की जरूरत है. खाद्य सुरक्षा के उपरांत अब पोषण सुरक्षा की दिशा में वैज्ञानिक सतत प्रयत्नशील हैं. ताकि कुपोषण दर को घटाया जा सके. इसी कड़ी में मशरूम की खेती को बढ़वा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विवि मशरूम के क्षेत्र में 52 तरह के उत्पादों का निर्माण कर ब्रांडिंग कर चुका है. इंटरप्रेन्योरशिप की दिशा में खासतौर से प्रयास किया जा रहा है. जिससे ग्रामीण परिवेश में मशरूम के व्यवसाय से देश के युवाओं के बीच रोजगार का सृजन संभव हो सके. विशिष्ट अतिथि के रूप में सत्र को संबोधित करते हुए प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ रत्नेश कुमार सिंह ने कहा कि मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में बिहार आज नंबर वन बना हुआ है. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भूमिहीन गरीब किसान एवं महिलाओं के लिए मशरूम व्यवसाय वरदान साबित हो रहा है. स्वागत भाषण करते हुए मशरूम विशेषज्ञ डॉ दयाराम ने कहा कि मशरूम एक विषय है. मशरूम क्रांति की शुरुआत भी विवि से ही हुई है. फिलवक्त मशरूम की 10 प्रजाति उगाया जा रहा है. बिहार के सभी जिलों में सामान्य तौर से मशरूम की खेती की जा रही है. बिहार सरकार मशरूम उत्पादन को फसल का दर्जा देकर सोने पे सुहागा की कहावत को चरितार्थ कर दिया. संचालन सेंटर प्रभारी डॉ आरपी प्रसाद ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ आरपीके राय ने दिया. मौके पर बिहार के विभिन्न जिले से आए हुए 40 प्रतिभागियों के अलावा मुकेश कुमार, मुन्नी, निशा आदि मौजूद थे.
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