बंदूक है, गोली नहीं कहीं अलार्म खराब

बैंक की सुरक्षा ढीली. डीएसपी की जांच में खुलासा समस्तीपुर : जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित बैंक सुरक्षा को लेकर कितने संवेदनशील हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकतर बैंकों में अलार्म या तो खराब हैं या फिर वर्षों से उनकी जांच नहीं हुई. कहीं सीसीटीवी है तो उसमें रिकाॅडिंग […]

बैंक की सुरक्षा ढीली. डीएसपी की जांच में खुलासा

समस्तीपुर : जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित बैंक सुरक्षा को लेकर कितने संवेदनशील हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकतर बैंकों में अलार्म या तो खराब हैं या फिर वर्षों से उनकी जांच नहीं हुई. कहीं सीसीटीवी है तो उसमें रिकाॅडिंग की व्यवस्था नहीं है. कुछ बैंक तो ऐसे हैं जिनके गार्ड के पास बंदूक है,
लेकिन गोली नहीं. इसका खुलासा सदर डीएसपी की जांच में हुआ है. जिले और आसपास के क्षेत्रों में बैंक लूट की घटनाओं के बाद जिला पुलिस ने बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच अपने स्तर से की थी. इसमें जो बात सामने आयी वह चौंकाने वाली है. अपनी रिपोर्ट डीएसपी ने सभी बैंकों के शाखा प्रबंधक को भेजी है. साथ ही रिपोर्ट में मिली गड़बड़ियों को तत्काल दुरुस्त करने को भी कहा है.
सीसीटीवी खराब
निरीक्षण के दौरान डीएसपी ने पाया कि एक दो बैंक को छोड़ कहीं भी सीसीटीवी की सही व्यवस्था नहीं है. कुछ बैकों में लगे कैमरों की क्वालिटी इतनी खराब है कि उसकी रिकाॅर्डिंग को ठीक से देखा नहीं जा सकता. वहीं कुछ में कैमरे ऐसे जगह लगाये गये हैं जहां से बैंक में आने-जाने वालों की गतिविधियों पर नजर ही नहीं पड़ती है. इनके पास प्रयाप्त रिकार्डिंग मेमोरी भी नहीं है, जबकि कई स्थानों पर इन कैमरों को सेंट्रल सर्वर से कनेक्ट भी नहीं किया गया है.
अलार्म है, बजता नहीं
जांच में इस बात का खुलासा भी हुआ कि बैंकों में आपातकालीन अलार्म की व्यवस्था तो है लेकिन उसका मार्क ड्रील नहीं होता है. जांच के दौरान ज्यादातर बैंकों में अलार्म बजा ही नहीं, जबकि कई स्थानों पर बजने के बाद बंद ही नहीं हुआ. वहीं इन अलार्म की फ्रिक्वेंसी भी कम पायी गयी.
नहीं मिले सुरक्षा गार्ड : जांच के क्रम में अधिकांश बैंकों के पास अपना कोई सुरक्षा गार्ड नहीं है. कुछ जगहों पर गार्ड है, लेकिन वे ड्यूटी में कार्यशील नहीं दिखे. एक दो बैंक में गार्ड अपने हथियार के साथ मौजूद थे. लेकिन उनकी बंदूक में गोली ही नहीं थी. खासकर ग्रामीण इलाकों की शाखाओं में सुरक्षा गार्ड न के बराबर दिखे, जबकि इन शाखाओं में इनकी खास जरूरत होती है.
बैंक लूट की घटनाओं के बाद जिला पुलिस ने अपने स्तर से की बैंकों की जांच
बैंकों में मिली कई खामियां
कर्मियों के पास नहीं है पुलिस का नंबर
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आयी कि अधिकतर शाखाओं के प्रबंधक और कर्मियों के पास संबंधित थाना और थानाध्यक्ष का कोई संपर्क नंबर नहीं है. न ही शाखा में किसी भी स्थान पर इसका उल्लेख किया गया है,जबकि नियमत: हर शाखा में संबंधित थानों का नंबर होना जरूरी है. ताकि दुर्घटना के समय तत्काल पुलिस से संपर्क साधा जा सके. इसके अलावा कैश ले जाने के दौरान बैंक पुलिस को इसकी सूचना देने में भी कोताही बरत रहे हैं. इसके अलावा कई बिंदुओं पर भी गड़बडि़यां मिली हैं, जिनमें अविलंब सुधार करने को कहा गया है.

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