समस्तीपुर : पर्यावरण सुरक्षा के लिये वन विभाग की ओर से गठित डीईआइएए समूह मिल का पत्थर साबित होगा. इससे जहां पर्यावरण सुरक्षा की अनदेखी करने वाले पर लगाम कसा जा सकेगा. वहीं अवैध आर मिलों के कारोबार व पेड़ों की कटाई को भी रोका जा सकेगा. विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर जहां अंकुश लगगी.
साथ ही खनन के कारण होने वाले पर्यावरण असंतुलन को भी रोका जा सकेगा. वन विभाग ने इसके लिये अविलंब डीईआइएए समूह के गठन करने का निदेश दिया है. डीईआइएए समूह जिला स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण है जो कि जिला में होने वाले हर पर्यावरण ढांचा में बदलाव लाने के लिये इसकी इजाजत जरूरी होती है.
समूह की रूपरेखा
जिला स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण कमेटी का गठन का निर्णय इसी वर्ष जनवरी माह में लिया गया था. चार सदस्यीय इस कमेटी की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगें. वहीं सदर अनुमंडल पदाधिकारी इस कमेटी के सदस्य सह सचिव भी होंगे. इसके आलावा इस कमेटी में वन प्रमंडल पदाधिकारी, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक की ओर से नामित एक विशेषज्ञ सदस्य के तौर पर रहेंगें. कमेटी का कार्यकाल तीन साल का होगा. प्राधिकरण का निर्णय जिला स्तरीय विशेषज्ञ कमेटी की अनुशंसा पर आधारित होगी. इसी आधार पर निर्णय होगा.
प्राधिकरण का निर्णय होगा लागू
सड़क निर्माण में पेड़ों की कटाई हो या किसी तरह की भी खनन का कार्य. किसी भी तरह की पर्यावरण या पेड़ों की कटाई के लिये किसी भी विभाग को प्राधिकरण का मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. प्राधिकरण का कार्य होगा कि वह ऐसे निर्णय लेने से पहले जिला के पर्यावरण ढांचा में बदलाव का अध्ययन कर इस बाबत फैसला देगी. अभी जहां अधिकतर फैसला मुख्यालय स्तर से होता है. वहीं प्राधिकरण के गठित होने के बाद जिला स्तर की अनुशंसा अनिवार्य होगी.
