समस्तीपुर : स्थानीय सदर अस्पताल में सोमवार को एक एचआइवी पीड़ित दंपती इलाज को घंटों भटकते रहे. फर्श पर पड़े उक्त पीड़ित को कोई भी स्वास्थ्य कर्मी छूने तक को तैयार नहीं था. इमरजेंसी में तैनात कर्मी उसे ओपीडी में जाने की सलाह दे रहे थे, जबकि सुबह सात बजे ओपीडी नहीं खुला था. अस्पताल का ओपीडी सुबह आठ बजे से खुलता है. परिजनों के हो हल्ला के बाद इमरजेंसी में ही उक्त मरीज का इलाज शुरू हुआ.
बताया जाता है कि दिल्ली के रोहिनी नगर में रह कर उक्त 32 वर्षीय युवक पिछले कई वर्षों से मजदूरी करता था. इसी दौरान गलत आदतों के कारण उसे एचआइवी से ग्रस्ति हो गया. कुछ वर्षों से वह दिल्ली में ही इलाज करा रहा था. इधर, हालत गंभीर होने पर वह घर विभूतिपुर लौट आया. रात घर पर उसकी पुन: स्थिति गंभीर हुई तो उसे परिजन तड़के सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. लेकिन अस्पताल के कर्मियों का कहना था कि अस्पताल में एड्स पीड़ितों का इलाज नहीं होता है.
चिह्नित लोगों को एसकेएमसीएच भेज दिया जाता है. पीड़ित के परिजनों का कहना था कि सुबह करीब छह बजे अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन पीड़ित को कोई भी देखने को तैयार नहीं हो रहे हैं. परिजनों का आरोप था कि इमरजेंसी में डॉक्टर तो हैं पर उनका इलाज नहीं कर रहे हैं. बाद में मीडियाकर्मी के पहुंचने पर फर्श पर ही डॉक्टर ने पीड़ित का इलाज शुरू किया़ साथ ही एआरटी केंद्र में संपर्क की सलाह दी.
