अपनी रहनुमा तलाश रहीं विक्षिप्त महिलाएं

समस्तीपुर : सड़कों पर रोजाना हजारों लोग गुजरते है. मगर सड़कों पर पड़ी विक्षिप्त महिलाओं की स्थिति को देखने वाला कोई नहीं है. समाज व अपने लोगों से दूर यह नारकीय जिंदगी जीने को विवश है. अगर आज के समय में महिलाओं का मानसिक संतुलन खो जाये तो इसकी स्थिति लोगों को समझ में आ […]

समस्तीपुर : सड़कों पर रोजाना हजारों लोग गुजरते है. मगर सड़कों पर पड़ी विक्षिप्त महिलाओं की स्थिति को देखने वाला कोई नहीं है.

समाज व अपने लोगों से दूर यह नारकीय जिंदगी जीने को विवश है. अगर आज के समय में महिलाओं का मानसिक संतुलन खो जाये तो इसकी स्थिति लोगों को समझ में आ सकती है. सम्मान की जगह ऐसी महिलाएं उपेक्षा का दंश झेलने को विवश है. जहां जीवन की बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पाती है तो अन्य सुविधाओं की बात करना तो बेइमानी है. रोजाना जिले के सभी चौक चौराहे पर ऐसी महिलाएं भटकते नजर आ जाती है. जिन्हें बेहतर चिकित्सा व सुविधाओं की जरुरत होती है.
महिलाओं के अधिकार की रक्षा करने वाले लोग भी ऐसी विक्षिप्त महिलाओं से अपना मुंह फेर लेते है. सभी योजनाएं यहां आने तक अपना दम तोड़ देती है. विगत कई माह में विक्षिप्त महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ है. मानसिक संतुलन बिगड़ जाने के कारण ऐसी महिलाओं को अपना घर बार का पता नहीं रहता है.
कभी कड़ी धूप में किसी पेड़ की छांव तले तो कहीं स्टेशन चौके के पास होटलों के ईद गिर्द भोजन के लिये भटकती यह महिलाएं लोगों को नजर आ जायेगी. दूसरे के निवाला व झूठन पर इनकी भूख मिटती है. तो सड़कों पर फेंके हुए कपड़े से तन को ढकने के लिये. अपने घरों व लोगों से दूर इनके आशियाने की छाया आसमान ही होती है.
लाइफ स्टाइल में बिगड़ जाता संतुलन
चिकित्सकों की मानें तो तेजी से बदल रही लाइफ स्टाइल व अपनों से दर्द व उपहास झेल न सकने के कारण महिलाएं अपना संतुलन खो देती है. इसके बाद इनकी सही चिकित्सा की जगह घरवाले इन्हें सड़कों पर छोड़ देते है. इसके बाद यह गांव गांव थाने थाने भटकने को विवश होती है.
रक्षा गृह में इनके रहने की व्यवस्था: महिला विकास निगम की समन्वयक ज्योति अर्चना ने बताया कि सरकार की ओर से पटना के गायघाट में उत्तर रक्षा गृह का संचालन किया जा रहा है. जहां ऐसी महिलाओं की चिकित्सा व आवास की व्यवस्था है.
इसके अलावा बेगूसराय में सोर्ट स्टे होम का संचालन किया जा रहा है.
हालांकि यहां वैसी महिलाओं को भेजा जाता है जिसकी अवस्था ठीक हो. थाना के अनुशंसा पर महिला विकास निगम ऐसी महिलाओं का पता लगाती है. विगत वर्षो में अब तक पांच ऐसी महिलाओं को उत्तर रक्षा गृह भेजा जा चुका है.

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