भवन निर्माण के लिये छह साल से फाइल अटकी पड़ी मार्च में अब तक 14 अगलगी की घटनाएं

समस्तीपुर : अग्निशमन विभाग कहने को तो सरकार की आवश्यक सेवाओं में शुमार होती है. मगर जमीनी हालात यह है कि यह सरकार के विभागों में सबसे हाश्यिे पर है. सिमित संसाधन तो कहना काफी होगा यहां तो संसाधनों का टोटा ही टोटा लगा है. जब इस विभाग को पानी के लिये भी दूसरों के […]

समस्तीपुर : अग्निशमन विभाग कहने को तो सरकार की आवश्यक सेवाओं में शुमार होती है. मगर जमीनी हालात यह है कि यह सरकार के विभागों में सबसे हाश्यिे पर है. सिमित संसाधन तो कहना काफी होगा यहां तो संसाधनों का टोटा ही टोटा लगा है. जब इस विभाग को पानी के लिये भी दूसरों के सहारे रहना पड़ रहा है तो इससे आग बुझाने की उम्मीद रखना अनावश्यक होगा. वर्षो से एक जर्जर भवन में इस विभाग को संचालित किया जा रहा है. जिसकी भवन निर्माण की राशि तो है मगर प्रशासन आज तक भूमि उपलब्ध नहीं कराया पाया है.

पानी की समस्या
अग्निशमन विभाग को दमकल के लिये पानी की आपूर्ति लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की शहरी जलमीनार से की जाती है. विभाग के पास जो एक मात्र हाइडेंट पानी की आपूर्ति के लिये बना था. वहां पीएचइडी की ओर से पानी की आपूर्ति ही नहीं की जाती है. इसका कारण यह है कि शहरी जलमीनार की पेयजल की आपूर्ति की व्यवस्था वर्षो से बेकार पड़ी है. इससे जलमीनार के आसपास स्थित अधिकारियों के आवास व विभागीय परिसर को छोड़कर पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है.जबकि अग्निशमन विभाग का हाइडेंट जलमीनार से आधा किलोमिटर की दूरी पर है. औसतन एक बड़ी गाड़ीं को पानी से लबालब करने में 55 मीनट का समय लगता है. इसके लिये दमकल विभाग सभी दमकलों को पानी से भर कर रखता है. जिससे आवश्यक समय पर इसका उपयोग किया जा सके.

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